1 जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि आने वाले सप्ताह अमेरिका और ईरान के संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकते हैं। उनका कहना है कि यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में बनाए गए आर्थिक और कूटनीतिक दबाव का किस तरह जवाब देता है।

एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान वेंस ने कहा, “क्या यह एक बहुत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण हो सकता है? इसका जवाब स्पष्ट रूप से हां है। लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अमेरिका के दबाव और कूटनीतिक प्रयासों पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।”

ईरान के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण पर जोर

वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन का प्रमुख उद्देश्य केवल किसी सीमित समझौते तक पहुंचना नहीं है, बल्कि ईरान के पूर्ण और सत्यापित परमाणु निरस्त्रीकरण (Denuclearisation) को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है जिसमें अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण की मजबूत व्यवस्था हो और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे स्थायी और सत्यापित समझौते की तलाश में है, जिसे निरीक्षण व्यवस्था का समर्थन प्राप्त हो और जिससे ईरान के पूरे परमाणु कार्यक्रम पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।

‘ईरान का जवाब तय करेगा भविष्य’

वेंस ने स्वीकार किया कि उन्हें खुद भी इस बात को लेकर संदेह है कि ईरान सभी शर्तों का पालन करेगा या नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान सकारात्मक रुख अपनाता है तो दोनों देशों के संबंधों में एक नई शुरुआत हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि ईरान सहयोग नहीं करता, तब भी अमेरिका के पास कई ऐसे विकल्प और दबाव के साधन मौजूद हैं, जिनके जरिए वह अपने रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल कर सकता है।

जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकालने की सलाह

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मौजूदा बातचीत को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल “शुरुआत का अंत” है और अभी कई महत्वपूर्ण चरण बाकी हैं।

वेंस ने कहा कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी क्योंकि आगे भी कई दौर की बातचीत और फैसले होने बाकी हैं।

व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस

अमेरिका केवल ईरान के साथ द्विपक्षीय समझौते तक सीमित नहीं रहना चाहता। वेंस के अनुसार, वॉशिंगटन एक व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर काम करना चाहता है, जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), इज़राइल, लेबनान और अन्य क्षेत्रीय देशों की भूमिका भी शामिल होगी।

उन्होंने कहा कि अमेरिका मध्य-पूर्व में स्थायी शांति और संतुलित सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल बाजार पर भी नजर

वेंस ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति सामान्य हो रही है और कुछ दिनों में युद्ध से पहले की तुलना में भी अधिक तेल निर्यात दर्ज किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि तेल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिल रही है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने माना कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।

ट्रंप प्रशासन को लेकर जताया भरोसा

वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन लगातार अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देते हुए रणनीति बना रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में लोग इस दौर को ऐसे समय के रूप में याद करेंगे, जब अमेरिका ने कूटनीति, आर्थिक दबाव और रणनीतिक संतुलन के जरिए अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाया।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल वार्ता ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक और सुरक्षा उपायों के माध्यम से भी इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश जारी रहेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयास आने वाले समय में मध्य-पूर्व की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है और दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे की बातचीत किस दिशा में बढ़ती है।

Bharat Baani Bureau

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