10 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत में एंटीमाइक्रोबियल-प्रतिरोधी (AMR) नवजात सेप्सिस की रोकथाम और बेहतर उपचार रणनीतियां विकसित करने के उद्देश्य से एक बहु-केंद्रित (Multi-centric) अध्ययन शुरू किया गया है। इस अध्ययन में देश के विभिन्न अस्पताल और चिकित्सा संस्थान भाग लेंगे।
नवजात सेप्सिस एक गंभीर संक्रमण है, जो जन्म के पहले 28 दिनों के भीतर शिशुओं को प्रभावित करता है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance) इस बीमारी के इलाज को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि नवजातों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया किन एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर चुके हैं। साथ ही, संक्रमण की पहचान, उपचार और रोकथाम के लिए अधिक प्रभावी रणनीतियां तैयार करने पर भी शोध किया जाएगा।
शोधकर्ता विभिन्न अस्पतालों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण कर संक्रमण के पैटर्न, जोखिम कारकों और उपचार के परिणामों का अध्ययन करेंगे। इससे देशभर में नवजात सेप्सिस के प्रबंधन के लिए बेहतर दिशानिर्देश तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस आज वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती है। नवजात शिशुओं में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य में एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग, संक्रमण नियंत्रण और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
