27 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत में पहली डेंगू वैक्सीन के आने से डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने इसके इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चेतावनी पर भी जोर दिया है।
डेंगू मच्छरों से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जो हर साल बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। इसके गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स में कमी, रक्तस्राव और शॉक जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
नई वैक्सीन से डेंगू संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभावशीलता व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और डेंगू वायरस के प्रकार जैसे कारकों पर निर्भर कर सकती है।
डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप होते हैं। किसी व्यक्ति को पहले डेंगू संक्रमण हो चुका है या नहीं, यह भी वैक्सीन से जुड़े जोखिम और लाभ को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण वैक्सीन लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन आने के बावजूद डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों की रोकथाम जरूरी रहेगी। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छररोधी उपाय अपनाना और मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना संक्रमण को कम करने में महत्वपूर्ण है।
भारत में डेंगू वैक्सीन की शुरुआत को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन के लाभों के साथ-साथ इससे जुड़ी सुरक्षा संबंधी सावधानियों के बारे में लोगों को सही और स्पष्ट जानकारी देना भी जरूरी है।
