12 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना की मौत की जांच के दौरान अदालत में सुनवाई में दावा किया गया कि उनकी देखभाल कर रहे डॉक्टरों ने उनकी हालत बिगड़ने से पहले मौजूद कई ‘चेतावनी संकेतों’ को नजरअंदाज किया था।

अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष माराडोना के इलाज और निगरानी से जुड़े घटनाक्रमों पर सवाल उठाए। मामले में यह जांच की जा रही है कि क्या उनकी चिकित्सा देखभाल में लापरवाही हुई थी और क्या समय रहते उनकी बिगड़ती हालत को पहचाना जा सकता था।

माराडोना की 25 नवंबर 2020 को 60 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हुई थी। उनकी मौत के बाद से उनके इलाज में शामिल चिकित्सा टीम की भूमिका को लेकर कानूनी जांच चल रही है।

अदालत में पेश किए गए बयानों और सबूतों में माराडोना की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी, डॉक्टरों की जिम्मेदारियों और उपचार के दौरान उठाए गए कदमों पर चर्चा हुई।

मामले में कई चिकित्सा पेशेवरों पर कथित लापरवाही से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। हालांकि, अदालत द्वारा अंतिम फैसला आने तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।

माराडोना के परिवार और अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उनकी देखभाल में गंभीर कमियां थीं, जबकि बचाव पक्ष मामले में अलग-अलग चिकित्सकीय और कानूनी तर्क पेश कर रहा है।

Bharat Baani Bureau

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