20 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : लुधियाना के प्रमुख उद्योगपति और ऑल इंडिया फर्नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष KK Garg तथा उनके बेटे को कथित फर्जी बिलिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस (DGGI) ने यह कार्रवाई की है। अधिकारियों ने मामले पर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

रिपोर्ट के अनुसार, मामला वित्त वर्ष 2020-21 से जुड़ा है और इसमें कथित तौर पर 10 से 15 करोड़ रुपये की GST चोरी की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, DGGI ने Garg को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था और बाद में देर रात उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की गई। उनके बेटे को भी इस मामले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है।

इस कार्रवाई के बाद लुधियाना और मंडी गोबिंदगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में चिंता का माहौल बताया जा रहा है। खासतौर पर स्टील और फर्नेस उद्योग से जुड़े कारोबारियों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने DGGI की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं। वर्ल्ड MSME फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय GST विभाग राजस्व बढ़ाने के लिए सख्त और एकतरफा रवैया अपना रहा है। उन्होंने GST कानून की कुछ धाराओं के बीच संभावित विरोधाभास का मुद्दा भी उठाया।

जिंदल का कहना है कि यदि कोई वास्तविक खरीदार किसी सप्लायर से स्क्रैप खरीदता है और निर्धारित टैक्स का भुगतान करता है, तो उसके लिए यह जानना हमेशा संभव नहीं होता कि सप्लायर ने वह माल किस स्रोत से हासिल किया था। उनके अनुसार, यदि सप्लाई चेन में किसी अन्य पक्ष ने टैक्स चोरी या फर्जी बिलिंग की हो, तो अंतिम खरीदार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

मंडी गोबिंदगढ़ फर्नेस एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंदर गुप्ता ने भी कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कारोबारी सप्लायर से प्राप्त बिलों के आधार पर अपना कारोबार करते हैं। यदि सप्लाई चेन में कोई अन्य व्यापारी गलत तरीके से कारोबार करता है या टैक्स धोखाधड़ी करता है, तो ईमानदार खरीदारों को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

फर्जी बिलिंग और GST से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां आमतौर पर इनवॉइस, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, टैक्स रिटर्न और संबंधित कारोबारी लेनदेन की जांच करती हैं। इस मामले में भी एजेंसी द्वारा वित्तीय दस्तावेजों और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच किए जाने की संभावना है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों में GST अनुपालन और फर्जी बिलिंग को लेकर पहले से ही सख्ती बढ़ी हुई है। स्टील, स्क्रैप और फर्नेस उद्योग में कई कारोबारियों के बीच इस तरह की जांच को लेकर चिंता बनी रहती है।

यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या जांच में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

DGGI की ओर से मामले में आगे की जांच जारी रहने की उम्मीद है। जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि कथित फर्जी बिलिंग में किन-किन कारोबारियों या संस्थाओं की भूमिका थी और क्या इससे किसी अन्य पक्ष को भी वित्तीय लाभ मिला।

उद्योग संगठनों ने सरकार से GST से जुड़े विवादों में वास्तविक कारोबारियों और कथित फर्जी बिलिंग करने वालों के बीच अंतर करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी कारोबारी ने निर्धारित दस्तावेजों और प्रक्रिया के तहत माल खरीदा है, तो उसे केवल सप्लाई चेन में किसी अन्य पक्ष की कथित गड़बड़ी के आधार पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

आने वाले दिनों में इस मामले में DGGI की जांच और अदालत की कार्यवाही से आगे की जानकारी सामने आ सकती है। फिलहाल उद्योग जगत की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी कथित GST चोरी और फर्जी बिलिंग के आरोपों को लेकर क्या अतिरिक्त कार्रवाई करती है।

Bharat Baani Bureau

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