28 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : ब्लड शुगर बढ़ने को आमतौर पर डायबिटीज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सामान्य से थोड़ा अधिक ग्लूकोज स्तर भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हल्का बढ़ा हुआ ब्लड शुगर या प्रीडायबिटीज फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, इसका संबंध संभव है, लेकिन हल्का बढ़ा हुआ शुगर अपने आप में फंगल इंफेक्शन होने का प्रमाण नहीं है। सबसे मजबूत संबंध लंबे समय तक बढ़े हुए ब्लड शुगर और अनियंत्रित डायबिटीज में देखा जाता है।
जब शरीर में ब्लड ग्लूकोज लंबे समय तक अधिक रहता है, तो संक्रमण से लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, शरीर में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज कुछ फंगस, खासकर Candida, के बढ़ने और शरीर की सतहों से चिपकने के लिए अनुकूल वातावरण बना सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति जिसका ब्लड शुगर थोड़ा बढ़ा हुआ है, उसे फंगल इंफेक्शन जरूर होगा। फंगल संक्रमण के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिनमें एंटीबायोटिक का इस्तेमाल, कमजोर इम्यून सिस्टम, हार्मोनल बदलाव, नमी और कुछ दवाएं शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज कैंडिडायसिस के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।
कौन से फंगल इंफेक्शन हो सकते हैं?
ब्लड शुगर बढ़ने की स्थिति में सबसे ज्यादा चर्चा कैंडिडायसिस की होती है। यह मुंह, त्वचा और जननांग क्षेत्र में हो सकता है। महिलाओं में बार-बार होने वाला vaginal yeast infection और पुरुषों में कुछ प्रकार के genital fungal infections बढ़े हुए शुगर से जुड़े हो सकते हैं।
इसके अलावा, डायबिटीज से पीड़ित लोगों में त्वचा और नाखूनों के फंगल संक्रमण भी अधिक देखे जा सकते हैं। इनमें athlete’s foot, ringworm और onychomycosis यानी नाखून का फंगल इंफेक्शन शामिल हैं।
बार-बार संक्रमण क्यों महत्वपूर्ण है?
एक बार फंगल इंफेक्शन होना जरूरी नहीं कि ब्लड शुगर की समस्या का संकेत हो। लेकिन यदि संक्रमण बार-बार हो रहा है, उपचार के बावजूद ठीक नहीं हो रहा या सामान्य से अधिक समय ले रहा है, तो डॉक्टर से इसके संभावित कारणों पर चर्चा करना उचित हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बार-बार होने वाले फंगल इंफेक्शन के साथ अगर अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बिना वजह वजन कम होना या डायबिटीज की पारिवारिक हिस्ट्री जैसी बातें मौजूद हों, तो ब्लड ग्लूकोज की जांच पर विचार किया जा सकता है।
क्या प्रीडायबिटीज भी जोखिम बढ़ाती है?
प्रीडायबिटीज का अर्थ है कि ब्लड शुगर सामान्य से अधिक है, लेकिन डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचा है। आमतौर पर प्रीडायबिटीज में स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
हल्के बढ़े हुए शुगर और फंगल इंफेक्शन के बीच संबंध डायबिटीज जितना स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध विशेषज्ञ जानकारी के अनुसार, संक्रमण का जोखिम खास तौर पर तब अधिक महत्वपूर्ण होता है जब ग्लूकोज लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहे या डायबिटीज ठीक से नियंत्रित न हो। इसलिए केवल किसी एक बढ़े हुए शुगर टेस्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि फंगल इंफेक्शन उसी वजह से हुआ है।
फिर भी, बार-बार होने वाले संक्रमण को शरीर की ओर से मिलने वाले संकेत के रूप में देखा जा सकता है। एक हालिया अध्ययन में बार-बार होने वाले कान के फंगल संक्रमण वाले कुछ वयस्कों में पहले से पहचानी न गई डायबिटीज और प्रीडायबिटीज भी पाई गई, हालांकि इससे यह साबित नहीं होता कि हर recurrent fungal infection ब्लड शुगर की समस्या के कारण होता है।
कब करानी चाहिए ब्लड शुगर की जांच?
यदि किसी व्यक्ति को बार-बार फंगल इंफेक्शन हो रहे हैं, खासकर बिना स्पष्ट कारण के, तो डॉक्टर fasting blood glucose और HbA1c जैसे टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में oral glucose tolerance test भी किया जा सकता है।
2026 के American Diabetes Association मानकों के अनुसार, प्रीडायबिटीज में HbA1c 5.7% से 6.4%, fasting glucose 100 से 125 mg/dL, या 75 ग्राम oral glucose tolerance test में दो घंटे का ग्लूकोज 140 से 199 mg/dL हो सकता है।
हालांकि, इन आंकड़ों की व्याख्या व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिम कारकों को ध्यान में रखकर डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए।
