2 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) ::पंजाब के पटियाला स्थित प्रतिष्ठित यादविंद्रा पब्लिक स्कूल (YPS) में कई छात्रों की अचानक तबीयत बिगड़ने से स्कूल प्रबंधन, अभिभावकों और स्वास्थ्य विभाग में चिंता का माहौल बन गया। घटना के बाद फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को स्कूल के कुछ विद्यार्थियों की तबीयत अचानक खराब हो गई। इनमें से पांच बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कुछ अन्य विद्यार्थियों की हालत अपेक्षाकृत हल्की होने के कारण उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई गई है और स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार सभी बच्चे उपचार के बाद ठीक हैं।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों को यह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक कारण क्या था। फिलहाल फूड पॉइजनिंग केवल एक आशंका है और जांच पूरी होने से पहले किसी विशेष खाद्य पदार्थ या स्थान को बीमारी का कारण मानना जल्दबाजी होगी।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ विद्यार्थी स्कूल परिसर से बाहर गए थे और संभव है कि उन्होंने बाहर से खाना खाया हो। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि बच्चों की तबीयत बाहर खाए गए भोजन के कारण ही खराब हुई। स्वास्थ्य विभाग सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रहा है।
जांच के दौरान स्कूल परिसर में उपलब्ध भोजन, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का ध्यान इस बात पर भी है कि स्कूल में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और परोसने के दौरान निर्धारित स्वच्छता मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली जगहों पर सख्त स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भोजन बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों की साफ-सफाई तथा भोजन तैयार करने वाले पूरे वातावरण की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।
मंत्री के अनुसार, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल में भर्ती पांचों बच्चों की स्थिति को लेकर फिलहाल राहत की खबर है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि उनकी हालत स्थिर है और वे उपचार के दौरान ठीक हैं। कुछ अन्य बच्चों को मामूली परेशानी होने पर प्राथमिक उपचार दिया गया। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर सरकारी अस्पताल में भी उपचार की व्यवस्था उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं।
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे स्कूलों में जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी कैंपस में लंबे समय तक रहते हैं, वहां भोजन की गुणवत्ता, पानी की स्वच्छता, रसोई की साफ-सफाई और खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि प्रभावित छात्रों ने घटना से पहले क्या भोजन किया था, क्या सभी बच्चों ने एक ही भोजन या खाद्य पदार्थ का सेवन किया था और क्या स्कूल परिसर के बाहर भोजन करने वाले छात्रों में ही बीमारी के लक्षण दिखाई दिए। इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
अधिकारियों द्वारा स्कूल परिसर और भोजन से जुड़े संभावित स्रोतों की जांच के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर संबंधित खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा सकते हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्यार्थियों की तबीयत खराब होने के पीछे खाद्य विषाक्तता थी या कोई अन्य कारण।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता प्रभावित बच्चों की निगरानी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही, स्कूल प्रशासन से भी भोजन और स्वच्छता व्यवस्था से संबंधित जानकारी ली जा रही है। अभिभावकों के बीच पैदा हुई चिंता को देखते हुए जांच के परिणाम सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
पटियाला की इस घटना ने स्कूलों में फूड सेफ्टी और हाइजीन प्रोटोकॉल को लेकर सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। हालांकि अभी तक बीमारी के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि यह वास्तव में फूड पॉइजनिंग का मामला था या किसी अन्य कारण से छात्रों की तबीयत खराब हुई।
