4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व में चलाए जा रहे “ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट” में आधिकारिक रूप से शामिल होने का फैसला किया है। बेसेंट ने यूरोपीय संघ के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे “मजबूत और शुरुआती रुख” बताया। उनका कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान को वैश्विक वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल अपने परमाणु कार्यक्रम, हथियारों और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों को वित्तपोषित करने के लिए नहीं करने देंगे।
बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यूरोपीय संघ आधिकारिक रूप से ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान की उन वित्तीय गतिविधियों को रोकने के लिए काम करेगा, जिन्हें वॉशिंगटन तेहरान के परमाणु और हथियार कार्यक्रमों तथा उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों के लिए धन जुटाने से जोड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया ईरान को स्पष्ट संदेश दे रही है कि जब तक उसकी बची हुई वित्तीय “लाइफलाइन” को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक आर्थिक दबाव जारी रहेगा।
क्या है ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अगस्त 2026 के अंत में Operation Economic Outcast की शुरुआत की थी। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इसका उद्देश्य ईरानी सरकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को मिलने वाले आर्थिक और वित्तीय संसाधनों पर व्यापक दबाव डालना है।
अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, अभियान के तहत ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क, तेल की तस्करी और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले चैनलों को निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा डिजिटल एसेट्स, उन्नत तकनीक, सोना, विमानन और शिपिंग जैसे क्षेत्रों में भी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया गया है।
वॉशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि जो विदेशी संस्थाएं ईरान से जुड़े कारोबार में मदद करती हैं, उन्हें अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से अलग किए जाने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। अमेरिकी नीति में secondary sanctions का इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
EU ने वास्तव में क्या कहा?
बेसेंट ने EU के शामिल होने की घोषणा की, लेकिन यूरोपीय संघ के सार्वजनिक बयान की भाषा कुछ अधिक सावधान है। 31 अगस्त के EU बयान में कहा गया था कि संघ ईरान की “अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियों” को रोकने के प्रयासों का समर्थन करता है और इसके लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें अमेरिकी नेतृत्व वाला Operation Economic Outcast शामिल है।
EU ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर चिंता जताई है। इसके अलावा उसने क्षेत्र और यूरोप में अस्थिर गतिविधियों को रोकने, यूक्रेन में रूस के युद्ध के लिए ईरान के सैन्य समर्थन को समाप्त करने तथा ईरान के भीतर हिंसा और दमन को रोकने की मांग की है।
इसलिए बेसेंट का “officially joined” वाला बयान अमेरिकी प्रशासन के नजरिए को दर्शाता है, जबकि EU की ओर से उपलब्ध सार्वजनिक भाषा अतिरिक्त आर्थिक दबाव के समर्थन और आगे कदम उठाने की तैयारी पर केंद्रित है।
कूटनीति पर भी EU का जोर
यूरोपीय संघ ने आर्थिक दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। ब्रसेल्स का कहना है कि ईरान के साथ शांति वार्ता और तनाव कम करने के प्रयास जारी रहना जरूरी है।
EU ने विशेष रूप से Strait of Hormuz में नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षित आवाजाही को महत्वपूर्ण बताया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इसका रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
EU का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो वह अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाने के लिए तैयार है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
ईरान ने यूरोपीय संघ के अमेरिकी आर्थिक अभियान के समर्थन की आलोचना की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने EU के रुख को अमेरिकी “आर्थिक आतंकवाद” का समर्थन बताया है।
ईरानी पक्ष का आरोप है कि यूरोपीय संघ ने अमेरिका के दबाव के सामने अपनी स्वतंत्रता, कानूनों और मूल्यों से समझौता किया है। तेहरान का कहना है कि यूरोपीय देशों को अमेरिकी दबाव का हिस्सा बनने के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ईरान को वैश्विक वित्तीय नेटवर्क से और अधिक अलग करना है। अमेरिका पहले ही ईरान से जुड़े बैंकिंग, तेल, शिपिंग और अन्य क्षेत्रों पर व्यापक प्रतिबंध लगा चुका है।
नए अभियान के तहत वॉशिंगटन उन कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भी दबाव बढ़ा सकता है जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए ईरान के साथ व्यापार करना और अधिक जोखिमपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों का हालांकि मानना है कि ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच काम करता आया है और वैकल्पिक वित्तीय तथा व्यापारिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए अभियान का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और उसके सहयोगी प्रतिबंधों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।
अमेरिका-ईरान टकराव में नया आर्थिक मोर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में EU का अमेरिकी अभियान के समर्थन में आना वॉशिंगटन के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक समर्थन माना जा रहा है।
हालांकि, EU के लिए अमेरिका के साथ आर्थिक दबाव और ईरान के साथ संभावित कूटनीतिक रास्ते के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। यदि प्रतिबंधों का दायरा आगे बढ़ता है, तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल बेसेंट के बयान ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव को व्यापक अंतरराष्ट्रीय अभियान में बदलना चाहता है। दूसरी ओर, EU अतिरिक्त आर्थिक कदमों का समर्थन करते हुए भी बातचीत और तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यूरोपीय संघ अमेरिकी अभियान में किस स्तर तक व्यावहारिक रूप से भाग लेता है और इसका ईरान की अर्थव्यवस्था तथा पश्चिम एशिया की स्थिति पर कितना प्रभाव पड़ता है।
