4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में जोरदार वापसी की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और एशियाई शेयर बाजारों में तेजी के बीच घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 530 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि निफ्टी भी 23,950 के स्तर के आसपास पहुंच गया।
शुक्रवार सुबह 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 531.88 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,684.74 पर पहुंच गया। इसी तरह 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 78.25 अंक यानी 0.33 प्रतिशत बढ़कर 23,951.70 पर कारोबार करता दिखाई दिया। बाद के कारोबार में बाजार की तेजी और मजबूत हुई तथा सेंसेक्स करीब 700 अंक तक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया।
एशियाई बाजारों में तेजी का घरेलू बाजार को फायदा
भारतीय बाजार में तेजी का एक प्रमुख कारण एशियाई शेयर बाजारों का मजबूत प्रदर्शन रहा। शुक्रवार को हांगकांग का हैंग सेंग करीब 2 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 1.3 प्रतिशत और जापान का Nikkei 225 करीब 1.1 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। शंघाई का SSE Composite भी बढ़त में रहा।
इससे पहले अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गुरुवार को मजबूत तेजी देखने को मिली थी। डाउ जोन्स, S&P 500 और Nasdaq में उल्लेखनीय बढ़त ने वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम लेने की धारणा को मजबूत किया। खास तौर पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया।
फेड की ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें
बाजार की धारणा को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों से भी समर्थन मिला। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने संकेत दिया कि यदि आने वाले आंकड़े महंगाई में नरमी दिखाते हैं तो वह ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकने का समर्थन कर सकते हैं।
इन टिप्पणियों के बाद सितंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की बाजार संभावना घटकर लगभग 50 प्रतिशत रह गई, जो पहले करीब 63 प्रतिशत थी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और दरों को लेकर कम आक्रामक उम्मीदों ने वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया।
रिलायंस, बैंकिंग और आईटी शेयरों में खरीदारी
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के कई प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडिगो, ट्रेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस, टाइटन, अदाणी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे।
हालांकि सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। एक्सिस बैंक, Eternal और आईसीआईसीआई बैंक सहित कुछ कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे।
चार दिन की गिरावट के बाद राहत
शुक्रवार की तेजी से पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार चार कारोबारी सत्रों तक गिरावट में रहा था। गुरुवार को सेंसेक्स 417.49 अंक गिरकर 76,152.86 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 41 अंक टूटकर 23,873.45 पर बंद हुआ। बढ़ते कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पिछले कुछ सत्रों में निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी।
शुक्रवार की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगातार गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी की वापसी का संकेत देती है। हालांकि विशेषज्ञों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शुरुआती तेजी पूरे कारोबारी सत्र में कायम रहती है या नहीं।
एफआईआई अभी भी बिकवाली कर रहे
बाजार में तेजी के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs की बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयरों में करीब 2,345.87 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने करीब 4,977.46 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
यह आंकड़ा बताता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार में कमजोरी को खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं। हालांकि विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना बाजार की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है।
कच्चा तेल अब भी बड़ी चुनौती
शेयर बाजार में तेजी के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 95.98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल आयात बिल, मुद्रास्फीति और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है। इसी वजह से बाजार की मौजूदा तेजी के बावजूद निवेशक तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
रुपये और आगे की बाजार दिशा पर नजर
रुपये पर बढ़ते तेल दामों का दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री के जरिए रुपये को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप किया। रुपये ने 94.46 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार शुरू किया, जो पिछले बंद स्तर 94.4850 से थोड़ा मजबूत था।
कुल मिलाकर, चार दिन की गिरावट के बाद शुक्रवार की तेज रिकवरी ने भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बहाल किया है। वैश्विक बाजारों की तेजी, अमेरिकी फेड की नरम रुख वाली उम्मीदें और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि पश्चिम एशिया का तनाव, 95 डॉलर से ऊपर कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर दबाव ऐसे कारक हैं जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए शुक्रवार की तेजी को फिलहाल एक मजबूत रिबाउंड के रूप में देखा जा रहा है; बाजार की स्थायी तेजी की पुष्टि के लिए निवेशकों को आगे के कारोबारी सत्रों में वॉल्यूम, विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी होगी।
