9 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। Brent crude oil की कीमत बुधवार को $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो 24 जुलाई के बाद पहली बार है। क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और तेल आपूर्ति बाधित होने की बढ़ती आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।
Reuters के मुताबिक, बुधवार को 0721 GMT तक Brent crude futures $2.15 यानी 2.2% बढ़कर $100.07 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) crude $1.70 यानी 1.83% चढ़कर $94.73 प्रति बैरल हो गया। अगस्त की शुरुआत से Brent की कीमत में करीब 25% की बढ़ोतरी हो चुकी है।
तेल बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष और अधिक गंभीर हो गया है। हाल के दिनों में अमेरिकी और ईरानी सैन्य कार्रवाइयों के साथ-साथ ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। इससे निवेशकों को आशंका है कि पश्चिम एशिया से वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति और परिवहन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हूती हमले
तेल की कीमतों में ताजा उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में किए गए ड्रोन और मिसाइल हमले हैं। इन हमलों में अबहा, नजरान और जिजान सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया। जिजान में Saudi Aramco की रिफाइनरी में आग लगने की खबर सामने आई, जिससे संचालन प्रभावित हुआ।
सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों में नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित हुए तथा दर्जनों लोग घायल हुए। ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने से बाजार में यह चिंता बढ़ी कि यदि हमले जारी रहे तो क्षेत्र की तेल उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादकों में से एक है। इसलिए उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर किसी भी लंबे समय तक चलने वाले हमले का असर केवल क्षेत्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों पर भी पड़ सकता है।
Strait of Hormuz पर भी संकट
तेल बाजार के लिए एक और बड़ा जोखिम Strait of Hormuz है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग के जरिए तेल की आवाजाही में भारी गिरावट आई है।
Reuters के अनुसार, संघर्ष फिर तेज होने से पहले Hormuz से करीब 8 से 9 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का प्रवाह हो रहा था। हालिया घटनाक्रम के बाद यह मात्रा घटकर 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से भी नीचे आ गई है। इससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
इसके अलावा Red Sea भी चिंता का विषय बना हुआ है। यदि यहां जहाजों की आवाजाही में बाधा आती है, तो तेल उत्पादकों और खरीदारों को लंबे और महंगे वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष ने बढ़ाई चिंता
तेल बाजार में जोखिम उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों को नष्ट करने की कार्रवाई की। इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया। इन घटनाओं ने बाजार में यह डर पैदा किया कि संघर्ष और देशों तथा महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों तक फैल सकता है।
निवेशक अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव किस दिशा में जाता है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और खाड़ी क्षेत्र में तेल परिवहन प्रभावित रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी की संभावना बनी रह सकती है।
वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और औद्योगिक परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव आ सकता है।
अमेरिका, यूरोप और एशिया के केंद्रीय बैंक पहले से ही महंगाई और ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेज उछाल उनके लिए मौद्रिक नीति से जुड़े फैसलों को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है। Reuters के अनुसार, तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार में मुद्रास्फीति को लेकर चिंता बढ़ाई है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक तेल महंगा रहने की स्थिति में ईंधन, परिवहन और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर तत्काल असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगा, जिनमें रुपये की विनिमय दर, तेल कंपनियों की लागत और सरकारी कर शामिल हैं।
$100 के बाद कहां जा सकता है तेल?
तेल बाजार के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या Brent crude $100 के ऊपर टिकता है या मौजूदा तेजी अस्थायी साबित होती है। Goldman Sachs, Bank of America और HSBC सहित कई वित्तीय संस्थानों ने हाल के दिनों में अपने तेल मूल्य अनुमान बढ़ाए हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ और Hormuz तथा Red Sea जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर व्यवधान जारी रहा, तो तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है। दूसरी ओर, यदि संघर्ष में जल्द कोई कूटनीतिक समाधान निकलता है और आपूर्ति सामान्य होती है, तो कीमतों में कुछ नरमी भी आ सकती है।
फिलहाल Brent crude का $100 प्रति बैरल पार करना पश्चिम एशिया के बढ़ते संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
