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10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): कनाडा में बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर पहुंचे पंजाब के एक परिवार को करीब आठ साल बाद भारत लौटना पड़ा है। पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाला यह परिवार वर्ष 2018 में कनाडा पहुंचा था, लेकिन उसकी asylum claim यानी शरण की मांग और बाद में देश में रहने के लिए humanitarian and compassionate grounds पर की गई अपील को कनाडाई अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद परिवार को भारत निर्वासित कर दिया गया।

परिवार का मामला ऐसे समय सामने आया है जब कनाडा में immigration और asylum applications को लेकर नियमों और सरकारी प्रक्रियाओं पर लगातार चर्चा हो रही है। हजारों भारतीय परिवारों की तरह इस परिवार ने भी कनाडा में अपना जीवन स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन लगभग आठ साल तक चली इमिग्रेशन प्रक्रिया के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा।

2018 में कनाडा पहुंचा था परिवार

रिपोर्ट के अनुसार, परिवार मूल रूप से पंजाब के जालंधर का रहने वाला है। वर्ष 2018 में परिवार कनाडा पहुंचा था। वहां रहने के दौरान परिवार ने अपने भविष्य को लेकर कई योजनाएं बनाईं और देश में रहने के लिए कानूनी रास्तों का इस्तेमाल किया।

हालांकि, उनका asylum claim स्वीकार नहीं हुआ। कनाडा में asylum system उन लोगों को संरक्षण देने के लिए है जो अपने देश लौटने पर persecution या गंभीर खतरे का सामना करने का दावा करते हैं। आवेदन की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों द्वारा दावे और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया जाता है।

परिवार के लिए शुरुआती asylum claim के खारिज होने के बाद भी मामला समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने कनाडा में रहने की अनुमति हासिल करने के लिए मानवीय और करुणामूलक आधार यानी Humanitarian and Compassionate (H&C) grounds का सहारा लिया।

Humanitarian plea से भी नहीं मिली राहत

H&C applications कनाडाई immigration व्यवस्था में एक अलग रास्ता हैं, जिनके जरिए कुछ परिस्थितियों में आवेदक अपने मामले में मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखने का अनुरोध कर सकता है।

इस मामले में भी परिवार ने कनाडा में रहने के लिए ऐसी ही राहत मांगी। लेकिन उनकी humanitarian plea भी स्वीकार नहीं की गई। इसके बाद उनके पास कनाडा में रहने का वैध आधार नहीं बचा और आखिरकार निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

आठ साल से अधिक समय तक कनाडा में रहने के बाद भारत वापसी परिवार के लिए भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर बड़ा बदलाव है। इतने लंबे समय में परिवार का सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन कनाडा से जुड़ चुका था।

लंबे समय तक चली इमिग्रेशन प्रक्रिया

इस मामले का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि परिवार को कनाडा में पहुंचने के बाद तुरंत वापस नहीं भेजा गया। करीब आठ वर्षों तक उनका मामला अलग-अलग immigration प्रक्रियाओं और राहत के विकल्पों से गुजरता रहा।

पहले asylum claim पर फैसला हुआ और उसके बाद humanitarian and compassionate grounds पर राहत की कोशिश की गई। लेकिन दोनों स्तरों पर सफलता नहीं मिलने के बाद deportation का रास्ता खुल गया।

कनाडा की Immigration and Refugee Board (IRB) व्यवस्था में admissibility और immigration से जुड़े मामलों के लिए अलग प्रक्रियाएं हैं। यदि अधिकारियों को लगता है कि किसी व्यक्ति को कनाडा में रहने का अधिकार नहीं है, तो मामला संबंधित immigration प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकता है।

पंजाब से कनाडा जाने वाले परिवारों के लिए संदेश

यह मामला पंजाब और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे migration संबंधों के बीच महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में पंजाबी छात्र, कामगार और परिवार कनाडा को शिक्षा, रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए चुनते हैं।

हालांकि, किसी भी देश में लंबे समय तक रहने की इच्छा के बावजूद immigration status को लेकर कानूनी आवश्यकताओं का पालन करना जरूरी होता है। केवल कई वर्षों तक किसी देश में रहना अपने आप में permanent residence या citizenship का अधिकार नहीं देता।

Asylum claim और humanitarian application दोनों अलग-अलग कानूनी आधारों पर विचार किए जाते हैं और प्रत्येक मामले में व्यक्तिगत परिस्थितियों तथा उपलब्ध साक्ष्यों का महत्व होता है।

परिवार के लिए आठ साल बाद नई शुरुआत

कनाडा में बिताए आठ वर्षों के बाद भारत लौटना परिवार के लिए आसान नहीं होगा। जिस देश में उन्होंने कई साल बिताए, वहां उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा जुड़ चुका था। अब उन्हें भारत में अपने जीवन को दोबारा व्यवस्थित करना होगा।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि विदेश में बसने की योजना बनाने वाले परिवारों के लिए immigration प्रक्रिया को समझना कितना महत्वपूर्ण है। आवेदन, visa status, asylum proceedings, appeals और humanitarian applications जैसे प्रत्येक चरण के अपने अलग नियम और समयसीमा होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेश जाने वाले लोगों को केवल एजेंटों या अनौपचारिक सलाह पर निर्भर रहने के बजाय संबंधित देश के आधिकारिक immigration नियमों और योग्य कानूनी सलाहकारों से जानकारी लेनी चाहिए।

कनाडा की immigration नीति पर फिर चर्चा

पंजाबी परिवार का deportation कनाडा की व्यापक immigration policy को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है। देश में asylum claims की संख्या, processing times और immigration system पर दबाव जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।

भारतीय समुदाय, खासकर पंजाबी diaspora, कनाडा की immigration व्यवस्था में होने वाले बदलावों पर करीब से नजर रखता है। ऐसे मामलों में परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह रहती है कि लंबे समय तक चले मामलों के बावजूद अंततः उनका भविष्य किस दिशा में जाएगा।

फिलहाल इस परिवार की आठ साल लंबी कनाडा यात्रा समाप्त हो चुकी है और उसे भारत लौटना पड़ा है। उनकी कहानी यह बताती है कि विदेश में लंबे समय तक रहना और वहां स्थायी रूप से बसने का कानूनी अधिकार दो अलग-अलग बातें हैं। Asylum और humanitarian grounds पर राहत नहीं मिलने के बाद परिवार को कनाडा छोड़ना पड़ा और अब पंजाब में उन्हें अपने जीवन की एक नई शुरुआत करनी होगी।

Bharat Baani Bureau

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