10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): सिंगापुर में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को कथित तौर पर साइबर ठगी का शिकार बनाने के मामले में करीब 13 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी हरनेक सिंह को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार कर लिया है। सिंह को अमेरिका से भारत निर्वासित किए जाने के बाद CBI ने अपनी हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, उसे जल्द ही विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (CBI मामले), पंचकूला की अदालत में पेश किए जाने की संभावना है।
हरनेक सिंह के खिलाफ यह मामला वर्ष 2013 से लंबित था। जांच एजेंसी के अनुसार, वह कथित साइबर धोखाधड़ी और फर्जी पहचान दस्तावेजों से जुड़े मामले में वांछित था। लंबे समय तक देश से बाहर रहने के कारण वह जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर रहा, लेकिन अमेरिका में उसके खिलाफ हुई कार्रवाई और बाद में भारत भेजे जाने के बाद अब CBI को मामले की जांच आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।
2013 से था फरार
CBI के मुताबिक, हरनेक सिंह के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था। करीब 13 वर्षों तक उसके ठिकाने को लेकर जांच एजेंसियों को तलाश थी। इस दौरान आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रही, जबकि वह भारत से बाहर रह रहा था।
मामले में आरोपी की गिरफ्तारी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि साइबर अपराधों में शामिल आरोपियों का विदेश में चले जाना जांच एजेंसियों के लिए अक्सर बड़ी चुनौती बन जाता है। अलग-अलग देशों में मौजूद आरोपियों को भारत वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण या deportation जैसी प्रक्रियाओं का सहारा लेना पड़ता है।
सिंगापुर में NRIs को निशाना बनाने का आरोप
यह मामला कथित तौर पर सिंगापुर में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को साइबर धोखाधड़ी के जरिए ठगने से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर सिंगापुर, अमेरिका और अन्य देशों में रहने वाले NRIs को निशाना बनाया था।
मामले में फर्जी पहचान, दस्तावेजों के दुरुपयोग और कथित रूप से धोखाधड़ी करने के लिए तकनीकी माध्यमों के इस्तेमाल की बात जांच में सामने आई थी। जून 2025 में इस मामले से जुड़े दो अन्य आरोपियों को साइबर धोखाधड़ी के लिए दोषी ठहराए जाने की जानकारी भी सामने आई थी, जबकि हरनेक सिंह उस समय फरार बताया गया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सिंह ने कथित तौर पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज और पहचान से संबंधित गतिविधियों में भूमिका निभाई। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
अमेरिका से भारत लाया गया
हरनेक सिंह की गिरफ्तारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह लंबे समय तक अमेरिका में रह रहा था। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उसे भारत निर्वासित किए जाने के बाद CBI ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
विदेश में फरार आरोपी को भारत वापस लाना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इससे जांचकर्ताओं को आरोपी से पूछताछ करने, कथित नेटवर्क के बारे में जानकारी हासिल करने और मामले में अन्य संभावित कड़ियों की जांच करने का अवसर मिलेगा।
अब CBI अदालत से आरोपी की हिरासत मांग सकती है, ताकि मामले से जुड़े दस्तावेजों, कथित फर्जी पहचान और अन्य आरोपियों के साथ उसके संबंधों की जांच की जा सके।
फर्जी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल
मामले की जांच में फर्जी पहचान और दस्तावेजों के कथित इस्तेमाल का पहलू भी सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसी ने हरनेक सिंह पर पहचान पत्रों के दुरुपयोग और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था।
साइबर अपराधों में फर्जी पहचान का इस्तेमाल जांच एजेंसियों के लिए विशेष चुनौती पैदा करता है। आरोपी अलग-अलग नामों, दस्तावेजों या डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। यही वजह है कि ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन, संचार और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
13 साल बाद जांच में नया मोड़
हरनेक सिंह की गिरफ्तारी से करीब 13 वर्ष पुराने मामले में अब नया मोड़ आया है। जांच एजेंसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि इतने लंबे समय तक आरोपी कहां-कहां रहा और कथित अपराध के बाद उसने किन लोगों के साथ संपर्क बनाए रखा।
CBI उसके कथित सहयोगियों, वित्तीय लेन-देन और विदेश में रहने के दौरान गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटा सकती है। साथ ही, एजेंसी यह भी जांच सकती है कि क्या इस मामले से जुड़े अन्य आरोपी या संदिग्ध अभी भी विदेश में मौजूद हैं।
अदालत में पेशी पर नजर
गिरफ्तारी के बाद हरनेक सिंह को पंचकूला स्थित विशेष CBI अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। अदालत में जांच एजेंसी आरोपी की हिरासत और आगे की जांच के लिए जरूरी अनुमति मांग सकती है।
मामले में अदालत के समक्ष पेश होने वाले दस्तावेज और CBI की जांच यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि आरोपी की कथित भूमिका कितनी व्यापक थी और साइबर ठगी के नेटवर्क में उसका स्थान क्या था।
13 साल तक फरार रहने के बाद हुई यह गिरफ्तारी जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, किसी भी आरोपी को दोषी तभी माना जा सकता है जब अदालत में आरोप कानूनी रूप से साबित हों। फिलहाल CBI की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पुराने साइबर ठगी मामले से जुड़े कई सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।
