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11 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज के लिए पिछले कुछ महीने एक असामान्य सीख लेकर आए। करीब 12 महीने तक लगातार क्रिकेट खेलने के बाद जब उन्हें दो महीने का ब्रेक मिला, तो यह आराम और फिटनेस पर काम करने का मौका माना गया। लेकिन मैदान से यह लंबा अंतराल उनके लिए उलटा साबित हुआ। वापसी के बाद सिराज अपनी पुरानी गति और लय में नजर नहीं आए और श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनकी गेंदबाजी में वह धार नहीं दिखी, जिसके लिए वह जाने जाते हैं।

सिराज ने अब स्वीकार किया है कि उनका शरीर लंबे ब्रेक के बाद जल्दी अपनी लय नहीं पकड़ पाता। चेन्नई में दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद उन्होंने कहा कि उनके लिए थोड़े समय का आराम ठीक है, लेकिन दो महीने का पूरा ब्रेक उनके 10 साल के करियर में पहली बार आया था। जिम में फिटनेस पर काम करने और कभी-कभार गेंदबाजी करने के बावजूद वह मैच की तीव्रता को दोहरा नहीं सके।

जब रफ्तार भी साथ छोड़ गई

सिराज की परेशानी सिर्फ विकेटों की संख्या तक सीमित नहीं थी। उनकी गेंद की गति भी प्रभावित हुई। ब्रेक के बाद जब वह भारतीय टेस्ट टीम में लौटे, तो वह कई मौकों पर 120 के आखिरी हिस्से और 130 किलोमीटर प्रति घंटे के शुरुआती हिस्से में गेंदबाजी करते दिखे, जबकि उनकी पहचान तेज गति, आक्रामक रन-अप और लगातार दबाव बनाने वाले स्पेल से रही है।

श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में भी यही समस्या दिखाई दी। सिराज ने माना कि उन्हें अपनी गेंदबाजी का सबसे अहम हिस्सा—रिदम—नहीं मिल पा रहा था। खासकर कोलंबो टेस्ट में उन्होंने अपने रन-अप तक को छोटा करने की कोशिश की, लेकिन इससे समस्या और स्पष्ट हो गई।

सिराज के मुताबिक, उनकी गेंदबाजी पूरी तरह लय पर निर्भर करती है। रन-अप में कदमों का तालमेल बिगड़ने पर वह क्रीज से उसी ताकत के साथ गेंद को रिलीज नहीं कर पाते। कुछ कदम छोटे और कुछ लंबे होने के कारण उनका पूरा फ्लो टूट गया और इसका सीधा असर गति पर पड़ा।

दलीप ट्रॉफी बनी वापसी की प्रयोगशाला

यही वजह थी कि चयनकर्ताओं ने सिराज को दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन के लिए खेलने का मौका दिया। चेन्नई की गर्म परिस्थितियों में यह मुकाबला उनके लिए सिर्फ एक घरेलू मैच नहीं था, बल्कि अपनी खोई हुई गेंदबाजी को दोबारा हासिल करने की कोशिश भी थी।

पहली पारी में सिराज ने 25 ओवर गेंदबाजी की और 145 रन खर्च किए, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। 5.60 की इकॉनमी रेट बताती है कि शुरुआत में वह नियंत्रण और लय दोनों के लिए संघर्ष कर रहे थे।

लेकिन सिराज ने इस प्रदर्शन को नाकामी की तरह नहीं देखा। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि मैच आगे बढ़ने के साथ स्पीड और गेंदबाजी का फ्लो बेहतर हो रहा था।

उन्होंने साफ कहा कि दलीप ट्रॉफी में उनका मुख्य लक्ष्य विकेट लेना नहीं, बल्कि अपनी रिदम वापस पाना था। लंबे समय तक गेंदबाजी करने से उनका शरीर फिर उसी पुराने पैटर्न में आने लगा।

‘जितने ज्यादा ओवर, उतनी बेहतर मेरी लय’

सिराज की वापसी की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने खुद लंबे स्पेल की मांग की। दूसरी पारी में उन्होंने लगातार लंबे स्पेल किए और एक समय सात ओवर का स्पेल भी डाला। बाद में उन्होंने 10 और 11 ओवर के लंबे स्पेल करने की बात कही।

उनके अनुसार, उनका शरीर लंबे स्पेल के दौरान बेहतर प्रतिक्रिया देता है। अगर वह लगातार ज्यादा ओवर नहीं डालते, तो उनकी लय वापस नहीं आती। दो महीने के ब्रेक के बाद क्रीज पर शरीर थोड़ा सुस्त महसूस कर रहा था और लंबे स्पेल ने उस जड़ता को तोड़ने में मदद की।

यह अनुभव सिराज के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हर तेज गेंदबाज का शरीर अलग तरीके से प्रतिक्रिया करता है। जो आराम किसी दूसरे गेंदबाज के लिए फायदेमंद हो सकता है, जरूरी नहीं कि वही सिराज के लिए भी उतना ही प्रभावी हो।

मोहम्मद शमी की सलाह बनी अहम

सिराज की वापसी में एक और अनुभवी तेज गेंदबाज की भूमिका रही—मोहम्मद शमी। दलीप ट्रॉफी फाइनल के दौरान दोनों के बीच बातचीत हुई। शमी ने सिराज को उनकी मूल ताकतों पर लौटने की सलाह दी।

शमी के मुताबिक, पहली पारी में सिराज अपनी प्राकृतिक लय में नहीं थे। उन्होंने उन्हें अपने पुराने तरीके पर लौटने और अपनी बुनियादी खूबियों पर भरोसा करने को कहा। उनका मानना था कि जब रन-अप और रिदम एक साथ काम करते हैं, तो लाइन और लेंथ भी अपने आप बेहतर होने लगती है।

यह सलाह सिराज के लिए काफी उपयोगी साबित हुई। दूसरी पारी में उनका रन-अप फिर पुराने अंदाज में दिखाई दिया और स्पीडोमीटर पर उनकी गति 130 किलोमीटर प्रति घंटे के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने लगी।

श्रीलंका से चेन्नई तक का अंतर

श्रीलंका दौरे पर सिराज के लिए सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वह अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी में नहीं थे। दलीप ट्रॉफी फाइनल में भी शुरुआत आसान नहीं रही, लेकिन लगातार गेंदबाजी करने से उनके शरीर और दिमाग का तालमेल वापस आने लगा।

सिराज ने माना कि दो महीने के बाद सीधे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में उतरने पर शरीर उसी तरह प्रतिक्रिया नहीं करता। सब कुछ थोड़ा धीमा लगता है। लेकिन एक पूरा मैच खेलने के बाद शरीर दोबारा क्रिकेट की गति में लौटने लगा।

यह अनुभव उनके करियर में एक महत्वपूर्ण सबक बन सकता है। खासकर ऐसे तेज गेंदबाज के लिए जो अपनी गेंदबाजी में गति के साथ-साथ रन-अप की लय और शरीर की ऊर्जा पर बहुत निर्भर करता है।

असली सिराज की पहचान

सिराज की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उनकी गति नहीं है। वह नई गेंद से स्विंग, सीम और आक्रामक लाइन के जरिए बल्लेबाज पर दबाव बना सकते हैं। जब वह लय में होते हैं, तो उनकी गेंदबाजी में हर गेंद पर विकेट की संभावना दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी वापसी सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं, बल्कि टीम इंडिया के तेज गेंदबाजी आक्रमण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

दलीप ट्रॉफी में उनका संघर्ष यह भी बताता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शीर्ष स्तर पर बने रहने के लिए सिर्फ जिम और नेट अभ्यास पर्याप्त नहीं होते। मैच की परिस्थितियों में लगातार गेंदबाजी करना शरीर को उस खास लय में वापस लाने के लिए जरूरी हो सकता है।

एक मुश्किल ब्रेक से मिला बड़ा सबक

मोहम्मद सिराज के लिए दो महीने का ब्रेक एक ऐसी सीख बन गया जिसे वह अपने आगे के करियर में शायद नहीं भूलेंगे। आराम जरूरी है, लेकिन उनके शरीर के लिए लंबा क्रिकेट ब्रेक उतना सरल नहीं जितना दिखाई देता है।

चेन्नई में उन्होंने अपनी वापसी का रास्ता खुद चुना—ज्यादा ओवर, लंबे स्पेल और अपनी पुरानी रन-अप तकनीक पर भरोसा। शमी की सलाह ने भी उन्हें अपनी बुनियादी ताकतों की ओर लौटने में मदद की।

अब सिराज के सामने चुनौती इस लय को बरकरार रखने की है। उनका अपना सिद्धांत भी स्पष्ट है—मैदान पर उतरते ही पूरी मेहनत करना। यही मानसिकता उन्हें भारतीय तेज गेंदबाजी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती रही है।

दो महीने के ब्रेक ने उनकी लय तोड़ी जरूर, लेकिन चेन्नई ने उन्हें यह भी दिखा दिया कि अपनी गेंदबाजी की ‘आत्मा’ को वापस कैसे पाया जा सकता है—रन-अप में प्रवाह, लंबे स्पेल और लगातार प्रतिस्पर्धी क्रिकेट।

Bharat Baani Bureau

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