14 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज में पोषण को केवल सहायक व्यवस्था मानने के बजाय एक महत्वपूर्ण क्लिनिकल इंटरवेंशन के रूप में देखने की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि ICU में भर्ती मरीजों का समय पर पोषण आकलन और उचित मेडिकल न्यूट्रिशन थेरेपी संक्रमण जैसी जटिलताओं को कम करने, रिकवरी तेज करने, वेंटिलेटर पर रहने की अवधि घटाने और अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने से जुड़ी लागत को कम करने में मदद कर सकती है।
यह चर्चा ETHealthWorld Healthcare Leaders Summit के छठे संस्करण में हुई, जहां क्रिटिकल केयर और न्यूट्रिशन विशेषज्ञों ने “The Economics of Nutrition: Can Better Nutrition Reduce the Cost of Acute Care?” विषय पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कहा कि अस्पतालों को पोषण को मरीज के इलाज की मुख्य प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए, न कि इसे केवल डाइटिशियन या सपोर्ट सर्विस की जिम्मेदारी मानना चाहिए।
ICU में पहले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
Medanta, Gurugram के डॉ. हर्ष सप्रा ने कहा कि गंभीर बीमारी के दौरान मरीज अक्सर कैटाबोलिक स्टेट में चला जाता है, जिसमें शरीर तेजी से ऊर्जा और मांसपेशियों का इस्तेमाल करता है। ऐसे में मरीज के अस्पताल में आने के शुरुआती समय में ही उसके पोषण की स्थिति का आकलन करना महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, मरीज का पोषण मूल्यांकन पहले 24 घंटे के भीतर किया जाना चाहिए। जरूरत के अनुसार कैलोरी, प्रोटीन, ट्रेस एलिमेंट्स और सप्लीमेंट्स उपलब्ध कराने से रिकवरी बेहतर हो सकती है और कुछ मरीजों को वेंटिलेटर से जल्दी हटाने तथा ICU में रहने की अवधि कम करने में मदद मिल सकती है।
पोषण की अनदेखी बढ़ा सकती है इलाज की लागत
Apollo Hospitals के डॉ. हिमाल देव ने कहा कि अस्पतालों में लंबे समय तक पोषण की भूमिका एंटीबायोटिक्स, वेंटिलेटर और डायलिसिस जैसी प्रमुख चिकित्सा प्रक्रियाओं के पीछे चली गई है। लेकिन पोषण की कमी के कारण होने वाली जटिलताओं का आर्थिक असर काफी बड़ा हो सकता है।
अपर्याप्त पोषण से संक्रमण, लंबे समय तक वेंटिलेशन, दोबारा अस्पताल में भर्ती होने और मरीज की कार्यक्षमता वापस आने में देरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए पोषण पर खर्च को केवल अतिरिक्त लागत के रूप में देखने के बजाय यह आकलन करना जरूरी है कि पोषण की कमी के कारण बाद में स्वास्थ्य व्यवस्था को कितनी अधिक लागत उठानी पड़ सकती है।
मेडिकल न्यूट्रिशन थेरेपी पर जोर
Sir H. N. Reliance Foundation Hospital की डॉ. ईलीन कैंडाय ने पोषण को Medical Nutrition Therapy (MNT) के रूप में देखने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि मरीज को जितना संभव हो उतना पोषण देना ही पर्याप्त नहीं है; सही मात्रा और सही समय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मरीज को न तो जरूरत से कम पोषण मिले और न ही अत्यधिक फीडिंग की जाए। ICU में मरीज की स्थिति के अनुसार कैलोरी और प्रोटीन के लक्ष्य तय करने तथा उनकी नियमित निगरानी करने की जरूरत है।
शुरुआती एंटरल न्यूट्रिशन के संभावित फायदे
क्रिटिकल केयर संबंधी भारतीय दिशानिर्देशों में भी मरीज के ICU में भर्ती होने के शुरुआती चरण में पोषण आकलन की सिफारिश की गई है। यदि मरीज मुंह से पर्याप्त भोजन नहीं ले सकता, तो उसकी स्थिति के अनुसार शुरुआती एंटरल न्यूट्रिशन पर विचार किया जाता है। भारतीय दिशानिर्देशों में सामान्यतः शुरुआती 24–48 घंटे के भीतर एंटरल न्यूट्रिशन शुरू करने की सलाह दी गई है, हालांकि वास्तविक निर्णय मरीज की क्लिनिकल और हेमोडायनामिक स्थिति पर निर्भर करता है।
अंतरराष्ट्रीय ESPEN दिशानिर्देश भी ऐसे गंभीर मरीजों में, जिनके लिए मुंह से भोजन संभव नहीं है, 48 घंटे के भीतर शुरुआती एंटरल न्यूट्रिशन शुरू करने का समर्थन करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर रूप से बीमार सभी मरीजों में तुरंत पूरी कैलोरी की मात्रा देना उचित नहीं है और ओवरफीडिंग से बचना जरूरी है।
ICU में रहने की अवधि पर पड़ सकता है असर
अध्ययनों में शुरुआती पोषण और बेहतर क्लिनिकल परिणामों के बीच संबंध देखा गया है। एक बड़े अध्ययन में वेंटिलेटर पर रखे गए 27,887 वयस्क मरीजों का विश्लेषण किया गया। इसमें तीन दिनों के भीतर एंटरल न्यूट्रिशन पाने वाले मरीजों में देर से पोषण शुरू करने वाले मरीजों की तुलना में कम वेंटिलेशन अवधि, कम ICU और अस्पताल में रहने की अवधि तथा कम कुल लागत देखी गई। हालांकि यह अध्ययन अवलोकनात्मक था, इसलिए इसे सीधे कारण-परिणाम के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
वहीं, कुछ अध्ययनों में शुरुआती पोषण के लाभ उतने स्पष्ट नहीं रहे हैं। भारत जैसे मध्यम आय वाले देश में किए गए एक अध्ययन में पोषण शुरू करने के समय और ICU-free days के बीच महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। इससे स्पष्ट होता है कि पोषण की रणनीति मरीज की बीमारी, पोषण जोखिम, सहनशीलता और अन्य क्लिनिकल परिस्थितियों के अनुसार तय करना आवश्यक है।
फीडिंग में बार-बार रुकावट भी चुनौती
Fortis, Okhla के डॉ. रजत अग्रवाल ने ICU में पोषण देने के दौरान होने वाली बार-बार की रुकावटों की ओर ध्यान दिलाया। प्रक्रियाओं, जांचों या अन्य क्लिनिकल कारणों से फीडिंग रुकने पर मरीज निर्धारित पोषण लक्ष्य से पीछे रह सकता है।
इसलिए अस्पतालों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पोषण योजना केवल कागज पर न हो, बल्कि मरीज को वास्तव में निर्धारित कैलोरी और प्रोटीन का कितना हिस्सा मिल रहा है, इसकी नियमित निगरानी भी की जाए।
पोषण पूरी ICU टीम की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि पोषण केवल डाइटिशियन की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, डाइटिशियन, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को मिलकर मरीज की पोषण संबंधी जरूरतों की निगरानी करनी चाहिए।
अस्पतालों में Nutrition KPIs तय किए जा सकते हैं, जिनमें 24 घंटे के भीतर पोषण आकलन, समय पर एंटरल न्यूट्रिशन की शुरुआत, निर्धारित पोषण लक्ष्य हासिल करने की दर, संक्रमण की दर और ICU में दोबारा भर्ती होने जैसे संकेतक शामिल हो सकते हैं।
बेहतर पोषण से बेहतर रिकवरी की उम्मीद
ICU में पोषण का उद्देश्य केवल मरीज की कैलोरी जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि मांसपेशियों की क्षति कम करना, रिकवरी को समर्थन देना और गंभीर बीमारी के दौरान शरीर की बदलती जरूरतों के अनुसार पोषण उपलब्ध कराना है।
हालांकि हर मरीज के लिए एक जैसी पोषण रणनीति उपयुक्त नहीं होती। गंभीर रूप से बीमार मरीजों में अंडरफीडिंग और ओवरफीडिंग दोनों से बचना जरूरी है। इसलिए शुरुआती पोषण को व्यक्तिगत क्लिनिकल आकलन, नियमित निगरानी और बहु-विषयक टीम के निर्णय से जोड़ना अधिक प्रभावी दृष्टिकोण हो सकता है।
विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है कि पोषण को ICU उपचार की प्राथमिकताओं में उचित स्थान देने से मरीजों की रिकवरी और अस्पताल की लागत—दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। आने वाले समय में अस्पतालों के लिए चुनौती यह होगी कि वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर ऐसी पोषण नीतियां बनाई जाएं, जो मरीज के बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के साथ-साथ अनावश्यक स्वास्थ्य खर्च को भी कम कर सकें।
