15 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। डिजिटल भुगतान को लेकर चल रही शुल्क की अटकलों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा। वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर को जारी राजपत्र अधिसूचना में UPI लेनदेन को लेकर शुल्क-मुक्त दायरे को स्पष्ट किया है। इसके साथ ही RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को भी शुल्क से मुक्त रखा गया है।
सरकार के इस कदम से रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतानों को बड़ी राहत मिली है। अधिसूचना के अनुसार, कोई बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर भुगतान करने वाले या भुगतान प्राप्त करने वाले व्यक्ति से इन निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के इस्तेमाल पर सीधे या परोक्ष रूप से शुल्क नहीं ले सकेगा। यह प्रावधान Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A के तहत किया गया है।
96% UPI लेनदेन पर नहीं पड़ेगा शुल्क का असर
सरकार के इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रोजमर्रा के UPI भुगतानों का बहुत बड़ा हिस्सा शुल्क के संभावित दायरे से बाहर रहेगा। 2025-26 के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण के अनुसार, केवल करीब 4% UPI merchant transactions ऐसे हैं जिन पर भविष्य में MDR लागू होने की संभावना बनती है। इसका मतलब है कि संख्या के लिहाज से लगभग 96% merchant UPI transactions शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI का इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटी खरीदारी, किराना, भोजन, परिवहन, बिल भुगतान और अन्य रोजमर्रा के खर्चों के लिए होता है। इन छोटे भुगतान को मुफ्त रखने से डिजिटल भुगतान अपनाने की गति पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका कम होगी।
बड़े UPI भुगतान पर क्या होगा?
नई अधिसूचना ने ₹2,000 तक के UPI भुगतान के लिए स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन ₹2,000 से अधिक के merchant transactions पर भविष्य में MDR यानी Merchant Discount Rate लगाने की संभावना खुली हुई है। सरकार ने अभी यह नहीं कहा है कि ऐसे सभी भुगतानों पर निश्चित दर से शुल्क लगाया जाएगा।
अगस्त में सरकार ने स्पष्ट किया था कि यदि MDR लागू किया जाता है तो वह सीमित श्रेणी के merchant transactions पर ही होगा और ग्राहकों से UPI इस्तेमाल के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा था कि भविष्य का MDR debit या credit card की तुलना में काफी कम रखा जाएगा।
यानी बड़े व्यापारी लेनदेन में संभावित लागत का मुद्दा मुख्य रूप से merchant और payment ecosystem से जुड़ा होगा, न कि आम ग्राहक द्वारा UPI भुगतान करने के लिए सीधे शुल्क देने से।
Person-to-Person भुगतान पहले की तरह मुफ्त
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि Person-to-Person यानी P2P UPI transactions मुफ्त बने रहेंगे। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने के लिए UPI पर शुल्क लगाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
इससे परिवार के सदस्यों को पैसे भेजना, दोस्तों के बीच भुगतान करना, छोटे व्यक्तिगत ट्रांसफर और अन्य P2P लेनदेन बिना शुल्क जारी रहेंगे।
सरकार का फोकस UPI को टिकाऊ बनाने पर
UPI के लेनदेन में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। सरकार के अनुसार, जुलाई 2026 में अकेले UPI ने करीब 2,366 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹29.9 लाख करोड़ था। UPI अब भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का प्रमुख आधार बन चुका है और कई विदेशी देशों में भी इसका विस्तार हो चुका है।
सरकार का तर्क है कि लेनदेन की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा, तकनीकी बुनियादी ढांचे, सर्वर क्षमता, धोखाधड़ी रोकने और सिस्टम की विश्वसनीयता पर लगातार निवेश की जरूरत है। इसी कारण लंबे समय में UPI ecosystem को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए सीमित स्तर पर merchant-side MDR की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
ग्राहकों को राहत, छोटे कारोबारियों की भी सुरक्षा
सरकार के फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि UPI के कारण डिजिटल भुगतान की लागत आम उपभोक्ता पर न आए। खासकर छोटे दुकानदारों और कम मूल्य वाले लेनदेन को शुल्क से बाहर रखने से UPI के व्यापक इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय ने अगस्त में भी कहा था कि UPI आम नागरिकों के लिए मुफ्त रहेगा और भविष्य में यदि MDR लागू होता है तो वह केवल सीमित merchant transactions तक सीमित रहेगा। सरकार ने इसे वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान और UPI की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़कर देखा है।
क्या ग्राहक को ₹2,000 से ऊपर भुगतान पर तुरंत शुल्क देना होगा?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। नई अधिसूचना का सीधा मतलब यह है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन और RuPay debit card payments पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर शुल्क नहीं लगा सकते। ₹2,000 से अधिक के merchant transactions के लिए संभावित MDR की व्यवस्था अलग नियमों और दिशानिर्देशों के जरिए स्पष्ट की जानी है।
इसलिए आम UPI उपयोगकर्ता के लिए तत्काल संदेश यही है कि छोटे भुगतान पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे। साथ ही, सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि UPI को ग्राहकों के लिए शुल्क-आधारित प्रणाली बनाने का उद्देश्य नहीं है।
