16 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। वायु प्रदूषण को अब तक मुख्य रूप से फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन नए शोधों ने इसके मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता बढ़ाई है। अंतरराष्ट्रीय शोधों की समीक्षा में वायु प्रदूषण और आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास तथा आत्मघाती विचारों के बीच संबंध पाया गया है।
क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के नेतृत्व में किए गए एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में 29 अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण से पाया गया कि सूक्ष्म कण पदार्थ PM2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) के संपर्क का संबंध आत्महत्या तथा आत्मघाती व्यवहार के बढ़े हुए जोखिम से है। हालांकि शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इन निष्कर्षों को सीधे कारण-परिणाम के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
PM2.5 और NO₂ पर विशेष चिंता
PM2.5 बेहद छोटे वायु प्रदूषक कण होते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इनके संपर्क को पहले से ही हृदय, फेफड़ों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। नए शोध में इन्हीं सूक्ष्म कणों तथा NO₂ के संपर्क और आत्मघाती व्यवहार के बीच संबंध पर ध्यान दिया गया है।
शोधकर्ताओं ने 29 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इनमें आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास और आत्मघाती विचारों जैसे अलग-अलग परिणामों को देखा गया। इसके अलावा 16 अध्ययनों की एक अलग नैरेटिव समीक्षा में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), ओजोन और यहां तक कि शोर प्रदूषण के संभावित संबंधों पर भी चर्चा की गई। हालांकि प्रकाश और जल प्रदूषण के प्रभावों को लेकर निष्कर्ष स्पष्ट नहीं थे।
अमेरिका के नए अध्ययन में भी सामने आया संबंध
2026 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन ने इस विषय को और मजबूत शोध पद्धति से जांचा। Journal of Health Economics में प्रकाशित अध्ययन में अमेरिका के आठ वर्षों के दैनिक मृत्यु प्रमाणपत्रों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।
शोधकर्ताओं Claudia Persico और Dave Marcotte ने पाया कि दैनिक PM2.5 के स्तर में 1 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि का संबंध दैनिक आत्महत्याओं में लगभग 0.39 प्रतिशत वृद्धि से था। अध्ययन में आत्महत्या से संबंधित अस्पताल में भर्ती होने के मामलों के साथ भी संबंध पाया गया। शोधकर्ताओं ने पुरुषों, युवा लोगों और अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषण वाले काउंटियों में प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पाया।
शोध में हवा की दिशा को प्रदूषण के संपर्क के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि प्रदूषण और आत्महत्या के बीच संबंध को प्रभावित करने वाले कुछ अन्य कारकों को नियंत्रित किया जा सके। फिर भी यह अध्ययन भी यह स्थापित नहीं करता कि किसी व्यक्ति की आत्मघाती स्थिति का प्रत्यक्ष कारण वायु प्रदूषण ही था।
लंबे समय के प्रदूषण पर तस्वीर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं
दिलचस्प बात यह है कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क को लेकर सभी शोध एक जैसे निष्कर्ष नहीं देते। नीदरलैंड में 2026 में प्रकाशित एक राष्ट्रीय अध्ययन में 87 लाख वयस्कों को छह वर्षों तक फॉलो किया गया।
इस अध्ययन में NO₂, PM2.5 और PM10 के लंबे समय के संपर्क और आत्महत्या के जोखिम के बीच अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट संबंध नहीं मिला। हालांकि कम आय वाली महिलाओं में PM2.5 के संपर्क के साथ बढ़े हुए जोखिम का संबंध देखा गया। पुरुषों में ऐसा संबंध नहीं पाया गया।
इस अंतर से पता चलता है कि प्रदूषण और आत्मघाती व्यवहार के संबंध को समझने के लिए प्रदूषण की अवधि, स्तर, व्यक्ति की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अन्य मानसिक स्वास्थ्य कारकों को साथ में देखना जरूरी है।
मानसिक तनाव भी हो सकता है एक कड़ी
चीन में विश्वविद्यालय के छात्रों पर 2026 में किए गए एक अध्ययन में भी पर्यावरणीय प्रदूषण और आत्मघाती विचारों के बीच संबंध की जांच की गई। 20 शहरों के 22 विश्वविद्यालयों के 5,025 छात्रों के आंकड़ों के विश्लेषण में प्रदूषकों के मिश्रित संपर्क और आत्मघाती विचारों की संभावना के बीच संबंध पाया गया।
अध्ययन में यह संकेत मिला कि मानसिक तनाव इस संबंध में एक संभावित मध्यस्थ भूमिका निभा सकता है। यानी प्रदूषण का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित न रहकर तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े रास्तों के माध्यम से भी हो सकता है।
पुराने शोधों में भी मिले थे संकेत
यह विषय पूरी तरह नया नहीं है। 2021 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में PM2.5, PM10 और NO₂ के अल्पकालिक संपर्क तथा दैनिक आत्महत्या जोखिम के बीच छोटे लेकिन सकारात्मक संबंध पाए गए थे।
उस समीक्षा में PM2.5 में एक इंटरक्वार्टाइल रेंज की वृद्धि के साथ आत्महत्या के जोखिम का अनुमानित सापेक्ष जोखिम 1.02 था, जबकि PM10 के लिए यह 1.01 और NO₂ के लिए 1.03 था। शोधकर्ताओं ने साथ ही अध्ययन के बीच पर्याप्त विविधता और भविष्य में बेहतर शोध की जरूरत पर जोर दिया था।
विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने को कहा
नए निष्कर्षों का मतलब यह नहीं है कि प्रदूषित हवा में रहने वाला हर व्यक्ति आत्मघाती व्यवहार के अधिक जोखिम में होगा। आत्महत्या और आत्मघाती विचार कई जटिल सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, जैविक और आर्थिक कारणों से प्रभावित होते हैं।
शहरीकरण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, अकेलापन, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और तापमान जैसे कई कारक प्रदूषण और आत्मघाती व्यवहार के बीच दिखाई देने वाले संबंध को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से विशेषज्ञ प्रदूषण को संभावित modifiable public-health risk factor के रूप में देखने की बात करते हैं, लेकिन इसे आत्महत्या का एकमात्र कारण नहीं मानते।
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नया संकेत
शोधों के ये निष्कर्ष मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को अलग-अलग देखने के बजाय दोनों को एक साथ समझने की जरूरत की ओर संकेत करते हैं। यदि आगे के अध्ययन इस संबंध की पुष्टि करते हैं, तो वायु गुणवत्ता सुधारने की नीतियां शारीरिक बीमारियों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य की रोकथाम में भी भूमिका निभा सकती हैं।
फिलहाल वैज्ञानिक तस्वीर यह है कि वायु प्रदूषण और आत्मघाती व्यवहार के बीच संबंध के प्रमाण बढ़ रहे हैं, लेकिन कारण-परिणाम की पूरी कड़ी अभी स्थापित नहीं हुई है। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण के साथ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक समर्थन और समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता को भी आत्महत्या रोकथाम की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
