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23 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मजबूत और टिकाऊ वित्तीय ढांचे की जरूरत पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को नवगठित सातवें पंजाब वित्त आयोग के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं को अपनी बढ़ती जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता उपलब्ध कराना जरूरी है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ राज्य के स्तर पर अनुशासित वित्तीय प्रबंधन और टिकाऊ वित्तीय संस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय नागरिकों को बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके लिए संसाधनों के पारदर्शी, समान और टिकाऊ वितरण की व्यवस्था होनी चाहिए।

करों और शुल्कों के बंटवारे पर आयोग करेगा सिफारिश

सातवें पंजाब वित्त आयोग को राज्य और स्थानीय निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे को लेकर सिफारिशें तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग करों, शुल्कों, रोड टैक्स और अन्य राजस्व स्रोतों से प्राप्त आय में से पंचायतों और नगरपालिकाओं को दिए जाने वाले हिस्से के संबंध में सुझाव देगा।

आयोग राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस से प्राप्त शुद्ध आय को राज्य सरकार तथा पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच बांटने के तरीके पर भी सिफारिश कर सकता है। इसके साथ ही स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति सुधारने के उपाय सुझाना भी उसके दायरे में है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय शासन के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों और उनकी जिम्मेदारियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। पंचायतों और नगरपालिकाओं को सड़क, स्वच्छता, पानी, स्थानीय बुनियादी ढांचे तथा अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।

73वें संविधान संशोधन से जुड़ा वित्तीय विकेंद्रीकरण

मुख्यमंत्री ने राज्य वित्त आयोग को वित्तीय विकेंद्रीकरण का संवैधानिक माध्यम बताया। उनके अनुसार, 73वें संविधान संशोधन के तहत स्थापित पंचायती राज संस्थाओं को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी रूप से निभाने के लिए पर्याप्त वित्तीय क्षमता की आवश्यकता है। नगरपालिकाओं के लिए भी स्थानीय स्तर पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।

वित्तीय विकेंद्रीकरण का व्यापक उद्देश्य यह है कि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारियां केवल प्रशासनिक रूप से हस्तांतरित न हों, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध हों। इसी संदर्भ में राज्य वित्त आयोग स्थानीय निकायों की आय, व्यय और वित्तीय जरूरतों का आकलन कर सकता है।

राजस्व क्षमता और खर्च की समीक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने आयोग से स्थानीय निकायों की राजस्व क्षमता, खर्च की जिम्मेदारियों और वित्तीय आवश्यकताओं का व्यापक आकलन करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि आयोग की सिफारिशें व्यावहारिक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने वाली होनी चाहिए, ताकि स्थानीय निकाय अपनी जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से निभा सकें।

उन्होंने गैर-उत्पादक राजस्व खर्च को कम करने और प्रशासनिक व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर भी जोर दिया। इसके साथ तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि पूंजीगत संसाधनों का अधिक प्रभावी और कुशल इस्तेमाल किया जा सके।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश के स्तर पर भी राज्यों और स्थानीय संस्थाओं की वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रह और बढ़ती सार्वजनिक सेवा जरूरतों को लेकर चर्चा बढ़ रही है। वित्तीय प्रबंधन में सुधार, राजस्व आधार बढ़ाना और खर्च की गुणवत्ता बेहतर करना राज्यों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

सातवें पंजाब वित्त आयोग की संरचना

सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन पंजाब वित्त आयोग फॉर पंचायत्स एंड म्युनिसिपैलिटीज एक्ट, 1994 की धारा 3(1) के तहत किया गया है। आयोग की अध्यक्षता पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिवा प्रसाद कर रहे हैं। इसमें विशेषज्ञ सदस्य के तौर पर शोइकत रॉय को शामिल किया गया है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग और स्थानीय निकाय विभाग के प्रशासनिक सचिव आयोग के पदेन सदस्य हैं, जबकि विशेष सचिव, वित्त विभाग को पदेन सदस्य सचिव बनाया गया है।

आयोग को अपनी रिपोर्ट 30 सितंबर 2027 तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया है। इसकी सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली पांच वर्ष की अवधि को कवर करेंगी।

स्थानीय स्तर पर वित्तीय क्षमता का महत्व

पंजाब में पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय क्षमता सीधे तौर पर स्थानीय सेवाओं की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी है। यदि स्थानीय संस्थाओं के पास स्थिर और अनुमानित राजस्व स्रोत हों, तो वे अपनी योजनाओं और खर्च की बेहतर योजना बना सकती हैं।

दूसरी ओर, वित्तीय संसाधनों के साथ जवाबदेही और खर्च की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। आयोग की सिफारिशों में राजस्व वितरण, स्थानीय आय के स्रोत, व्यय प्राथमिकताओं और प्रशासनिक क्षमता के बीच संतुलन स्थापित करना महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

मुख्यमंत्री की बैठक में सामने आया जोर इसी व्यापक वित्तीय ढांचे को मजबूत करने पर है। अब सातवें वित्त आयोग की सिफारिशें यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं कि आने वाले पांच वर्षों में पंजाब सरकार और स्थानीय निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों का वितरण किस तरह किया जाए।

स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने का अंतिम प्रभाव नागरिक सेवाओं, स्थानीय बुनियादी ढांचे और जमीनी स्तर पर प्रशासन की क्षमता पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक बदलाव आयोग की अंतिम सिफारिशों और उन्हें लागू करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा।

Bharat Baani Bureau

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