7 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि जेलों में लंबे समय से बंद बंदी सिखों का मुद्दा अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकता। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार इस मामले के समाधान के लिए सभी उपलब्ध कानूनी और संवैधानिक रास्तों पर आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन बंदी सिंह इंसाफ मोर्चा की ओर से गठित चार सदस्यीय समिति के साथ बैठक के दौरान दिया। बैठक में समिति के सदस्यों ने बंदी सिखों की रिहाई से जुड़े मुद्दों और अपनी मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा।
चार सदस्यीय समिति ने मुख्यमंत्री के सामने रखी मांगें
मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में गुरदीप सिंह बठिंडा, एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर, पाल सिंह फ्रांस और बलविंदर पाल सिंह शामिल थे।
समिति ने उन सिख कैदियों के मामलों को उठाया, जिनके बारे में उसका कहना है कि उन्होंने अपनी निर्धारित सजा पूरी कर ली है, लेकिन इसके बावजूद वे विभिन्न जेलों में बंद हैं। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से इस मुद्दे पर आवश्यक कदम उठाने और संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की मांग की।
‘मामला अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रह सकता’
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि विभिन्न जेलों में बंद सिख कैदियों से जुड़ा यह मुद्दा लंबे समय से लंबित है और इसे अनिश्चितकाल तक unresolved नहीं छोड़ा जा सकता।
उन्होंने कहा कि सरकार इस संवेदनशील विषय को न्याय, मानवता और व्यक्तिगत अधिकारों के दृष्टिकोण से देख रही है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई संविधान और मौजूदा कानूनों के दायरे में रहकर की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो वैध कदम पहले उठाए जाने चाहिए थे लेकिन वर्षों तक नहीं उठाए गए, उन्हें अब प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगी कार्रवाई
भगवंत मान ने समिति को आश्वासन दिया कि पंजाब सरकार बंदी सिखों के मुद्दे के समाधान के लिए उपलब्ध हर वैध कानूनी और संवैधानिक विकल्प पर विचार करेगी।
हालांकि, बंदियों की रिहाई का अंतिम निर्णय प्रत्येक मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं तथा संबंधित सक्षम प्राधिकरणों की शक्तियों और प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है। ऐसे मामलों में राज्य सरकार की भूमिका भी संबंधित कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के अधीन रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ इस विषय को आगे बढ़ाएगी और कानून के तहत समाधान तलाशने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
लंबे समय से उठता रहा है बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा
बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहा है। विभिन्न सिख संगठन और प्रतिनिधि समय-समय पर उन कैदियों की रिहाई की मांग उठाते रहे हैं, जिनके बारे में उनका दावा है कि उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
इस मुद्दे में अलग-अलग बंदियों के मामले अलग कानूनी परिस्थितियों से जुड़े हैं। इसलिए प्रत्येक मामले में अदालतों के आदेश, सजा की अवधि, संबंधित अपराधों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है।
इसी कारण मुख्यमंत्री ने भी बैठक में सरकार की कार्रवाई को कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप रखने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी दी जानकारी
बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी समिति से हुई बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की बातों और बंदी सिखों की रिहाई से जुड़ी अपील को गंभीरता से सुना है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार इस मामले का उचित समाधान जल्द तलाशने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार के सामने चुनौती क्या है?
बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा कानूनी और संवैधानिक रूप से जटिल है। अलग-अलग मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकार, अदालतों के आदेश तथा संबंधित जेल प्रशासन और अन्य सक्षम प्राधिकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसे में पंजाब सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों का प्रभाव संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति पर निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार उपलब्ध वैधानिक रास्तों की पड़ताल करेगी, लेकिन किसी भी कार्रवाई को संविधान और कानून के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाएगा।
आगे की कार्रवाई पर नजर
मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद बंदी सिंह इंसाफ मोर्चा और अन्य संबंधित संगठनों की नजर अब सरकार की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर रहेगी।
फिलहाल सरकार ने किसी विशेष बंदी की तत्काल रिहाई की घोषणा नहीं की है। मुख्यमंत्री ने व्यापक रूप से सभी वैध कानूनी और संवैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल करने तथा लंबे समय से लंबित मुद्दे के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का भरोसा दिया है।
