8 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को धूरी में ‘मेरा घर, मेरे नाम’ योजना के तहत ‘लाल लकीर’ के अंदर बने मकानों के मालिकों को संपत्ति स्वामित्व प्रमाणपत्र वितरित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल के साथ उन परिवारों की दशकों पुरानी प्रतीक्षा खत्म होने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है, जो पीढ़ियों से अपने घरों में रह रहे थे, लेकिन उनके पास संपत्ति का औपचारिक सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
मुख्यमंत्री के अनुसार, योजना का उद्देश्य ऐसे मकानों को दस्तावेजी और सत्यापन योग्य स्वामित्व रिकॉर्ड से जोड़ना है। इसके तहत संपत्ति की सीमाओं के नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे, जिससे भविष्य में संपत्ति से जुड़े विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
‘मेरा घर, मेरे नाम’ योजना के तहत मिलेंगे संपत्ति कार्ड
भगवंत मान ने कहा कि ‘मेरा घर, मेरे नाम’ योजना के तहत पात्र परिवारों को उनकी संपत्ति का स्वामित्व प्रमाणित करने वाले दस्तावेज दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर संपत्ति को यूनिट नंबर, GPS लोकेशन, ड्रोन मैप और QR कोड से जोड़ा जाएगा।
सरकार के मुताबिक, इस प्रक्रिया से संपत्ति का एक व्यवस्थित और सत्यापन योग्य रिकॉर्ड तैयार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे जमीन और मकान से जुड़े पारिवारिक विवादों को कम करने में मदद मिलेगी, क्योंकि संपत्ति की सीमाएं और रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट होंगे।
गरीब, दलित और भूमिहीन परिवारों को लाभ का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का विशेष लाभ उन गरीब, दलित और भूमिहीन परिवारों को मिलेगा, जिनके घर गांवों की ‘आबादी’ में होने के बावजूद औपचारिक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।
उन्होंने कहा कि स्वामित्व का आधिकारिक रिकॉर्ड मिलने से इन परिवारों को अपने घर पर कानूनी अधिकार का दस्तावेज मिलेगा और भविष्य में संपत्ति से संबंधित प्रक्रियाओं में उन्हें अधिक स्पष्टता मिलेगी।
बैंक से कर्ज लेने में भी मिल सकती है सुविधा
भगवंत मान ने कहा कि संपत्ति का स्वामित्व प्रमाणपत्र मिलने के बाद जरूरत पड़ने पर लोग अपने घर के आधार पर बैंक से संस्थागत ऋण लेने में सक्षम हो सकते हैं।
सरकार का कहना है कि औपचारिक संपत्ति रिकॉर्ड नहीं होने के कारण ऐसे परिवारों को पहले बैंकिंग व्यवस्था में अपनी संपत्ति को वित्तीय सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल करने में कठिनाई होती थी। संपत्ति कार्ड इस प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर सकता है।
करीब 4,000 गांवों में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही करीब 4,000 गांवों में संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल प्रमाणपत्र बांटना नहीं, बल्कि गांवों में लंबे समय से मौजूद संपत्ति स्वामित्व से जुड़ी अस्पष्टता को समाप्त करना है।
क्या है ‘लाल लकीर’?
पंजाब के गांवों में ‘लाल लकीर’ से आम तौर पर उस आबादी क्षेत्र को संदर्भित किया जाता है, जिसे पारंपरिक रूप से गांव की बस्ती के रूप में चिन्हित किया गया था। ऐसे क्षेत्रों में लंबे समय से रहने वाले कई परिवारों के पास अपने मकान पर कब्जे और निवास के बावजूद आधुनिक राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप स्पष्ट संपत्ति दस्तावेज नहीं थे।
सरकार की ‘मेरा घर, मेरे नाम’ पहल का उद्देश्य ऐसे घरों की मैपिंग और रिकॉर्ड तैयार करके पात्र परिवारों को स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराना है। पंजाब सरकार ने पहले भी इस योजना के तहत विभिन्न गांवों में संपत्ति कार्ड बांटने की प्रक्रिया शुरू की थी।
संपत्ति विवादों को कम करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर और प्लॉट का स्पष्ट नक्शा तथा राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध होने से संपत्ति को लेकर होने वाले पारिवारिक विवादों में कमी आ सकती है। खासकर उन मामलों में जहां पीढ़ियों से मौखिक या अनौपचारिक तरीके से संपत्ति का इस्तेमाल होता रहा है, आधिकारिक रिकॉर्ड भविष्य के विवादों को सुलझाने में उपयोगी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि संपत्ति की पहचान, सीमांकन और रिकॉर्ड को डिजिटल तकनीक से जोड़ने से व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
दिसंबर तक सभी पात्र घरों को अधिकार देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने दिसंबर 2026 तक गांवों और शहरों में ‘लाल लकीर’ के अंदर बने पात्र घरों को मालिकाना हक देने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने इसे पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में एक व्यापक अभियान बताया।
हालांकि, प्रत्येक संपत्ति का स्वामित्व संबंधित रिकॉर्ड, पात्रता और प्रशासनिक सत्यापन की प्रक्रिया के आधार पर तय किया जाना होगा। इसलिए योजना के तहत सभी संपत्तियों का लाभ वास्तविक पात्रता और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही मिलेगा।
दशकों पुरानी समस्या के समाधान की कोशिश
‘लाल लकीर’ के अंदर बने मकानों का मुद्दा पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से संपत्ति अधिकारों से जुड़ा रहा है। सरकार का कहना है कि स्वामित्व प्रमाणपत्र, डिजिटल मैपिंग और राजस्व रिकॉर्ड तैयार होने से इन परिवारों को अपने घरों के संबंध में अधिक स्पष्ट कानूनी और दस्तावेजी स्थिति मिल सकेगी।
धूरी में प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का मकसद लोगों को उनके घर का स्पष्ट अधिकार देना और संपत्ति रिकॉर्ड को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
