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8 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): राइड-हेलिंग इंडस्ट्री में ड्राइवरों की कमाई लंबे समय से कई कारकों पर निर्भर रही है—दिन में कितनी राइड मिलीं, कितनी दूरी तय हुई, मांग कितनी रही और ईंधन समेत परिचालन खर्च कितना रहा। ऐसे में ज्यादा राइड करने के बावजूद हाथ में बचने वाली वास्तविक आय कई बार उम्मीद से कम रह जाती है।

दिल्ली-NCR में बढ़ती ईंधन लागत के बीच कुछ ड्राइवरों ने ऐसी ही चुनौतियों का उल्लेख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ ड्राइवरों ने बताया कि उनकी कमाई का 60-70 फीसदी तक हिस्सा ईंधन पर खर्च हो जाता है, जबकि एक ड्राइवर ने 17-18 घंटे काम करने के बावजूद करीब 1,500-1,600 रुपये प्रतिदिन कमाने की बात कही।

इसी पृष्ठभूमि में ड्राइवरों की कमाई को केवल प्रति-राइड भुगतान के बजाय अधिक स्पष्ट और अनुमान लगाने योग्य बनाने वाले मॉडल पर चर्चा बढ़ रही है।

राइड की संख्या से आगे बढ़कर कमाई का हिसाब

राइड-हेलिंग ड्राइवर के लिए दिन में 20 या 25 राइड पूरी करना अपने आप में यह नहीं बताता कि उसकी वास्तविक कमाई कितनी होगी। किराया, मांग, दूरी और वाहन के खर्च जैसे कई कारक अंतिम आय को प्रभावित करते हैं।

International Labour Organization (ILO) के भारत में प्लेटफॉर्म वर्क से जुड़े अध्ययन में भी यह चुनौती सामने आई है कि ड्राइवरों को ईंधन और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसे नियमित खर्च खुद उठाने पड़ते हैं, जबकि उनकी कमाई मांग और प्लेटफॉर्म पर काम के आवंटन के अनुसार बदल सकती है। कुछ ड्राइवर बुनियादी आय हासिल करने के लिए सप्ताह में 50-60 घंटे तक काम करते हैं।

ऐसे माहौल में कमाई का ऐसा मॉडल जिसमें ड्राइवर पहले से अपने साप्ताहिक या मासिक लक्ष्य का अनुमान लगा सके, उसके लिए काम के घंटे तय करना आसान बना सकता है।

Green SM ने पेश किया नया मॉडल

दिल्ली-NCR में हाल में परिचालन शुरू करने वाले इलेक्ट्रिक राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म Green SM ने ड्राइवरों की आय के लिए operating kilometres को महत्वपूर्ण आधार बनाने वाला मॉडल पेश किया है। कंपनी के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म 100 फीसदी VinFast इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करता है।

कंपनी द्वारा साझा किए गए मौजूदा मॉडल के तहत पात्र शर्तें पूरी करने वाले ड्राइवरों को साप्ताहिक 7,500 रुपये की बेस इनकम मिल सकती है। इसका भुगतान प्रत्येक मंगलवार किया जाता है।

इसके अलावा महीने के दौरान तय operating kilometres से जुड़ा अतिरिक्त incentive भी दिया जाता है।

2,500 किलोमीटर के बाद अतिरिक्त प्रोत्साहन

Green SM के अनुसार, ड्राइवर के महीने में 2,500 किलोमीटर पूरे करने के बाद अतिरिक्त किलोमीटर पर incentive मिलता है।

कंपनी के मौजूदा मॉडल में सामान्य समय के दौरान प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 12.50 रुपये प्रति किलोमीटर और peak hours में 16 रुपये प्रति किलोमीटर का incentive निर्धारित किया गया है। यह incentive अगले महीने की 5 तारीख को दिया जाता है।

इस तरह ड्राइवर की आय दो चक्रों में बनती है—एक साप्ताहिक बेस भुगतान और दूसरा मासिक performance-based incentive।

कंपनी का कहना है कि इससे ड्राइवरों को अपनी कमाई का बेहतर अनुमान लगाने और अपने काम के घंटों को लक्ष्य के अनुसार व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

ऐप में दिखाई देगा किलोमीटर का हिसाब

इस मॉडल की एक खास बात operating kilometres की ट्रैकिंग है। कंपनी के मुताबिक, ड्राइवर ऐप के माध्यम से यह देख सकते हैं कि उन्होंने कितनी दूरी पूरी की है और अगले incentive threshold तक पहुंचने के लिए कितनी दूरी बाकी है।

इससे ड्राइवर को हर राइड के बाद कमाई का हिसाब लगाने के बजाय पूरे सप्ताह या महीने के लक्ष्य पर ध्यान देने का विकल्प मिलता है।

उदाहरण के तौर पर कोई ड्राइवर अपने मासिक लक्ष्य को साप्ताहिक या दैनिक किलोमीटर के लक्ष्य में बांट सकता है। इससे काम के घंटों की योजना मांग के साथ-साथ व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार बनाने में मदद मिल सकती है।

इलेक्ट्रिक वाहन से परिचालन लागत घटाने का दावा

Green SM का मॉडल केवल आय की गणना तक सीमित नहीं है। कंपनी के अनुसार, उसके ड्राइवरों को V-Green और पार्टनर चार्जिंग स्टेशनों पर मुफ्त चार्जिंग की सुविधा भी मिलती है।

कंपनी का तर्क है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग लागत में राहत मिलने से ड्राइवरों के परिचालन खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर उन ड्राइवरों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है जिनकी आय का बड़ा हिस्सा पारंपरिक ईंधन पर खर्च होता है।

हालांकि, किसी भी आय मॉडल का वास्तविक लाभ ड्राइवर के काम के घंटे, वाहन की उपलब्धता, परिचालन शर्तों और कंपनी की लागू नीतियों पर निर्भर करेगा।

टिकाऊ आय का मतलब हर दिन समान कमाई नहीं

ड्राइवरों के लिए “सस्टेनेबल इनकम” का अर्थ जरूरी नहीं कि उन्हें हर दिन बिल्कुल समान राशि मिले। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वे अपनी संभावित आय का बेहतर अनुमान लगा सकें और उसके आधार पर काम की योजना बना सकें।

प्रति-राइड मॉडल में कम मांग वाला दिन सीधे कम कमाई में बदल सकता है। इसके विपरीत, किलोमीटर आधारित incentive मॉडल में ड्राइवर अपने लंबे समय के लक्ष्य पर नजर रख सकता है।

इससे कमाई को रोजाना की अनिश्चितता से निकालकर साप्ताहिक या मासिक योजना में बदलने की कोशिश की जाती है।

राइड-हेलिंग क्षेत्र में पारदर्शिता की बढ़ती जरूरत

राइड-हेलिंग क्षेत्र में ड्राइवरों की आय को लेकर पारदर्शिता एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है। किराए और मांग में बदलाव के साथ ड्राइवरों के लिए यह समझना हमेशा आसान नहीं होता कि दिन के अंत में उनकी वास्तविक कमाई कितनी होगी।

ऐसे में कमाई की गणना का स्पष्ट तरीका ड्राइवरों को अपने काम के घंटों, वाहन के खर्च और व्यक्तिगत बजट के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद कर सकता है।

Green SM का नया मॉडल इसी दिशा में एक उदाहरण है, जहां कंपनी ने प्रति-राइड कमाई के बजाय operating kilometres और निश्चित भुगतान चक्र को अधिक महत्व दिया है।

ड्राइवर से लेकर यात्री अनुभव तक असर

कमाई में अधिक स्पष्टता का असर केवल ड्राइवर की आर्थिक योजना तक सीमित नहीं हो सकता। यदि ड्राइवर को अपने काम और आय का बेहतर अनुमान हो, तो कंपनी के अनुसार वह यात्री सेवा, समय प्रबंधन और ड्राइविंग गुणवत्ता पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है।

हालांकि, इस तरह के मॉडल की वास्तविक सफलता का आकलन लंबे समय में ड्राइवरों की वास्तविक कमाई, काम के घंटों, खर्च और संतुष्टि के आंकड़ों से ही किया जा सकेगा।

फिलहाल दिल्ली-NCR में राइड-हेलिंग क्षेत्र में यह बदलाव इस बात की ओर संकेत करता है कि ड्राइवरों के लिए सिर्फ ज्यादा राइड हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। कमाई कितनी पारदर्शी, अनुमान योग्य और खर्च के बाद कितनी टिकाऊ रहती है—यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Bharat Baani Bureau

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