3 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : इजरायल में हाल ही में हुए संसदीय चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी सरकार के पक्ष में नहीं हैं, जो अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के समर्थन पर निर्भर हो। उनके इस बयान के बाद इजरायल में गठबंधन की राजनीति और सत्ता गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
नेतन्याहू ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनकी लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और वह व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने के लिए अन्य दलों से बातचीत करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मौजूदा सहयोगियों के साथ-साथ उन अन्य दलों को भी सरकार में शामिल करने पर विचार कर सकती है, जो उनके अनुसार आतंकवाद का समर्थन नहीं करते।
अरब पार्टियों के समर्थन पर नेतन्याहू का विरोध
नेतन्याहू ने अपनी पोस्ट में राम पार्टी (Ra’am) और जॉइंट लिस्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल की जनता ऐसी सरकार नहीं चाहती, जो इन दलों पर निर्भर हो। उन्होंने इन पार्टियों पर आतंकवाद का समर्थन करने और यहूदी राष्ट्र के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया। ये आरोप नेतन्याहू के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और संबंधित दलों का पक्ष अलग हो सकता है।
उन्होंने दावा किया कि यहूदी मतदाताओं के स्पष्ट बहुमत ने लिकुड को सबसे बड़ी पार्टी और उन्हें अगली सरकार का नेतृत्व करने का जनादेश दिया है। नेतन्याहू ने कहा कि चुनाव के पहले दिन से ही उनकी ओर से व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने का प्रस्ताव खुला है और वह इस संबंध में बातचीत के लिए तैयार हैं।
विपक्षी गठबंधन भी सरकार बनाने की कोशिश में
चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी दल भी सरकार बनाने के लिए अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट की पार्टी याशर को विपक्षी खेमे के कई दलों का समर्थन मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की पार्टी, यायर गोलान के डेमोक्रेट्स और एविग्डोर लिबरमैन की यिस्राएल बेतेनु ने आइजेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति के सामने समर्थन देने का फैसला किया है।
हालांकि, विपक्षी खेमे के सामने भी चुनौतियां हैं। उसे बहुमत के लिए अरब पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। दूसरी ओर, लिबरमैन ने नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने से इनकार किया है। उन्होंने अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर सरकार का भी विरोध किया है।
120 सदस्यीय संसद में बहुमत का गणित
इजरायल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। चुनाव के बाद सामने आए आंकड़ों के मुताबिक नेतन्याहू के मौजूदा गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि यहूदी विपक्षी दलों के पास 48 सीटें हैं। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं।
इस गणित के कारण किसी भी पक्ष के लिए अकेले बहुमत जुटाना आसान नहीं है। विपक्षी दल यदि अरब पार्टियों का समर्थन हासिल कर लेते हैं तो उनके पास बहुमत का आंकड़ा पहुंच सकता है, लेकिन इस विकल्प पर विपक्ष के भीतर भी मतभेद हैं। वहीं, नेतन्याहू अन्य दलों को साथ लाकर अपने गठबंधन का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की भूमिका अहम
इजरायल में सरकार गठन की प्रक्रिया में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राष्ट्रपति 4 नवंबर को चुनाव के आधिकारिक परिणाम प्राप्त करने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद वह किसी सांसद को सरकार बनाने का अवसर देने के लिए अपना निर्णय लेंगे।
नई संसद का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और गठबंधन के समीकरण काफी महत्वपूर्ण होंगे।
राजनीतिक गतिरोध के बीच बढ़ी अनिश्चितता
इजरायल के चुनाव परिणामों ने देश की राजनीति में कई सवाल खड़े किए हैं। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन उनके मौजूदा गठबंधन के पास बहुमत नहीं है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों के पास संभावित बहुमत का रास्ता है, लेकिन अरब पार्टियों के साथ सहयोग और नेतृत्व के सवाल पर उनके बीच सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा।
ऐसे में व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने का नेतन्याहू का प्रस्ताव कितना समर्थन जुटा पाता है और विपक्ष गादी आइजेनकोट के नेतृत्व में वैकल्पिक सरकार बनाने में सफल होता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
