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17 अप्रैल 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  India में आंखों से जुड़ी बीमारियां एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही हैं। बढ़ती आबादी, उम्रदराज़ लोगों की संख्या में इजाफा और जीवनशैली में बदलाव के कारण दृष्टि संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सस्टेनेबल आई केयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना समय की बड़ी जरूरत बन गया है।

भारत में लाखों लोग अभी भी समय पर आंखों की जांच और इलाज से वंचित हैं। ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव और जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। परिणामस्वरूप, कई लोग ऐसी समस्याओं का सामना करते हैं जिन्हें शुरुआती स्तर पर आसानी से रोका जा सकता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि सस्टेनेबल आई केयर सिस्टम का मतलब केवल अस्पतालों और क्लीनिकों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना है जो लंबे समय तक प्रभावी और सुलभ बना रहे। इसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सुपर-स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक मजबूत कड़ी बनाना जरूरी है।

भारत में मोतियाबिंद (cataract), ग्लूकोमा (glaucoma) और रेटिनोपैथी जैसी बीमारियां आम हैं। इनका समय पर पता लगाना और इलाज करना बेहद जरूरी है, क्योंकि देर होने पर ये स्थायी अंधापन का कारण बन सकती हैं।

टेक्नोलॉजी इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल आई क्लीनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्क्रीनिंग टूल्स के जरिए दूरदराज़ इलाकों तक सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि विशेषज्ञों की कमी को भी काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।

सरकार और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी (PPP मॉडल) भी इस क्षेत्र में सुधार ला सकती है। कई गैर-सरकारी संगठन पहले से ही इस दिशा में काम कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर मुफ्त या सस्ती आंखों की जांच और ऑपरेशन कर रहे हैं।

इसके अलावा, मानव संसाधन पर भी ध्यान देना जरूरी है। अधिक संख्या में ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित करना होगा, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

स्कूलों और समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना भी बेहद जरूरी है। यदि लोगों को आंखों की देखभाल के महत्व के बारे में समय रहते जानकारी दी जाए, तो कई समस्याओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।

वित्तीय रूप से भी आई केयर को सुलभ बनाना जरूरी है। बीमा योजनाओं और सरकारी योजनाओं के तहत आंखों के इलाज को शामिल करने से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिल सकती है।

कुल मिलाकर, India में सस्टेनेबल आई केयर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ है। बेहतर दृष्टि से न केवल जीवन की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि उत्पादकता भी बढ़ती है।

आने वाले समय में यदि सरकार, निजी क्षेत्र और समाज मिलकर इस दिशा में काम करें, तो भारत में आंखों से जुड़ी बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है और “सबके लिए बेहतर दृष्टि” का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

सारांश:

भारत में बढ़ती आंखों की समस्याओं को देखते हुए सस्टेनेबल आई केयर इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है, जिसमें टेक्नोलॉजी, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए सभी तक इलाज पहुंचाना शामिल है।

Bharat Baani Bureau

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