17 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। अमेरिका पर अपनी रक्षा और रणनीतिक निर्भरता को कम करने तथा यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कनाडा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने घोषणा की है कि कनाडा ने ब्रिटेन के नेतृत्व वाले जॉइंट एक्सपीडिशनरी फोर्स (JEF) में शामिल होने के लिए औपचारिक आवेदन कर दिया है।
कार्नी ने 16 सितंबर को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के साथ लिवरपूल में बैठक के दौरान यह घोषणा की। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कनाडा की JEF में भागीदारी के लिए ब्रिटेन के समर्थन की पुष्टि की। कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और नई तकनीकों के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने पर भी चर्चा की।
क्या है जॉइंट एक्सपीडिशनरी फोर्स?
Joint Expeditionary Force ब्रिटेन के नेतृत्व वाला एक बहुराष्ट्रीय सैन्य सहयोग समूह है, जिसमें फिलहाल 10 उत्तरी यूरोपीय NATO सदस्य देश शामिल हैं। इनमें डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, आइसलैंड, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं।
JEF का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण, परिचालन क्षमता और तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को मजबूत करना है। यह NATO और अन्य अंतरराष्ट्रीय अभियानों के साथ भी काम कर सकता है।
कनाडा पहले से ही NATO का सदस्य है। JEF में शामिल होने का आवेदन NATO की सदस्यता का विकल्प नहीं है, बल्कि यूरोपीय देशों के साथ अतिरिक्त रक्षा सहयोग का एक माध्यम है।
अमेरिका पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम
कनाडा का यह कदम ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को व्यापक बनाने पर जोर दे रही है।
कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार तथा टैरिफ को लेकर हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में ओटावा अपनी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।
Reuters के अनुसार, कनाडा JEF के जरिए यूरोपीय देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
यूरोपीय संघ के साथ भी बढ़ रही नजदीकी
कनाडा की यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकी केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला “एसोसिएट सदस्य” बनाने की संभावना पर विचार करने की इच्छा जताई है।
प्रस्ताव अभी शुरुआती स्तर पर है और “एसोसिएट सदस्यता” का स्वरूप तथा अधिकार स्पष्ट नहीं किए गए हैं। हालांकि, इससे कनाडा और EU के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की संभावना बनती है।
कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच पहले से ही व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता CETA लागू है। इसके अलावा कनाडा फरवरी 2026 में EU के SAFE रक्षा कार्यक्रम में शामिल हो चुका है और इसके तहत वह यूरोपीय तथा यूक्रेनी सुरक्षा से जुड़े सहयोग में भाग ले रहा है। कनाडा SAFE में शामिल होने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश है।
ब्रिटेन के साथ रक्षा उद्योग में भी सहयोग
कार्नी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के बीच बातचीत में रक्षा उद्योग से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने Global Combat Air Programme (GCAP) के माध्यम से संभावित सहयोग के अवसरों पर विचार किया।
कनाडा जुलाई 2026 में GCAP में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुआ था। यह कार्यक्रम अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग है।
दोनों देशों ने कनाडा में ब्रिटिश सेना के प्रशिक्षण केंद्र British Army Training Unit Suffield (BATUS) के आधुनिकीकरण से जुड़े BATUS Future Project पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य कनाडा में नई सैन्य तकनीकों और उपकरणों के विकास तथा परीक्षण की क्षमता को मजबूत करना है।
AI और आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा
रक्षा के अलावा कार्नी और बर्नहम ने आर्थिक सहयोग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों पर भी बातचीत की। दोनों नेताओं ने AI के सुरक्षित और जिम्मेदार विकास तथा इस्तेमाल के लिए सरकारों और तकनीकी क्षेत्र के बीच सहयोग की आवश्यकता पर सहमति जताई।
कनाडाई सरकार ने हाल के दिनों में यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, निवेश और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने को अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। कार्नी ने यूरोपीय संसद को संबोधित करने और EU नेताओं के साथ बातचीत के लिए सितंबर में यूरोप का दौरा भी किया।
2014 के बाद बदली स्थिति
कनाडा का JEF में शामिल होने का कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रिटेन ने करीब एक दशक पहले भी कनाडा को इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। 2014 में कनाडा ने उस समय JEF में शामिल होने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था।
अब बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच कनाडा ने यूरोपीय सुरक्षा ढांचे के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में औपचारिक कदम उठाया है।
कनाडा की JEF सदस्यता के आवेदन के साथ-साथ EU के साथ संभावित एसोसिएट सदस्यता पर चर्चा यह संकेत देती है कि ओटावा यूरोप के साथ अपने आर्थिक, राजनीतिक और रक्षा संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक ढांचे में विकसित करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, JEF में कनाडा की सदस्यता और EU की प्रस्तावित एसोसिएट व्यवस्था—दोनों की अंतिम शर्तें और समयसीमा अभी तय नहीं हुई हैं।
