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17 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान से बचाने के लिए यूरोपीय संघ में नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित EU Kids Act के तहत 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की योजना है। वहीं 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपने नाम से व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट रखने की अनुमति नहीं होगी।

वॉन डेर लेयेन ने 16 सितंबर को यूरोपीय संसद में अपने State of the Union 2026 संबोधन के दौरान इस योजना की घोषणा की। यूरोपीय आयोग के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य बच्चों की उम्र के अनुसार अलग-अलग स्तर की डिजिटल सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया नहीं

प्रस्ताव के अनुसार 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। 13 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सामान्य व्यक्तिगत अकाउंट के बजाय सीमित सुविधाओं वाले ‘मिनी अकाउंट’ का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।

ये मिनी अकाउंट माता-पिता या अभिभावकों द्वारा बनाए और नियंत्रित किए जाएंगे। इनमें सीमित फीचर्स और समय की पाबंदी होगी। वॉन डेर लेयेन के अनुसार, 13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए इस्तेमाल का समय एक घंटे प्रतिदिन तक सीमित रखने का प्रस्ताव है।

15 साल से कम उम्र में व्यक्तिगत अकाउंट पर रोक

प्रस्तावित व्यवस्था में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अपने नाम से स्वतंत्र सोशल मीडिया अकाउंट बनाने की अनुमति नहीं होगी। 13 से 15 वर्ष की आयु के बीच केवल अभिभावकीय निगरानी वाले सीमित अकाउंट की व्यवस्था होगी।

वहीं 15 से 18 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अधिक सुरक्षित डिजाइन अपनाना अनिवार्य करने की योजना है। इसका उद्देश्य ऐसे फीचर्स को सीमित करना है जो बच्चों को अत्यधिक या लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।

‘एडिक्टिव फीचर्स’ पर भी नजर

वॉन डेर लेयेन ने अपने संबोधन में सोशल मीडिया के ऐसे डिजाइन फीचर्स पर चिंता जताई जो उपयोगकर्ताओं को लगातार प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अत्यधिक और चरम सामग्री की ओर खींचने वाले फीचर्स को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से AI के जरिए लड़कियों की तस्वीरों के यौन शोषण वाले रूप में इस्तेमाल किए जाने की समस्या का भी उल्लेख किया। प्रस्तावित व्यवस्था में प्लेटफॉर्मों पर यह साबित करने की जिम्मेदारी डालने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है कि उनकी सेवाएं बच्चों के लिए सुरक्षित हैं।

ऑस्ट्रेलिया समेत दूसरे देशों से लिया गया अनुभव

यूरोपीय आयोग ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के मुद्दे पर विशेषज्ञों, युवाओं और अन्य पक्षों से चर्चा की है। आयोग ने ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के अनुभवों का भी अध्ययन किया है, जहां बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र आधारित प्रतिबंधों को लेकर कदम उठाए गए हैं।

जुलाई 2026 में यूरोपीय आयोग के विशेष पैनल ने भी बच्चों को सोशल मीडिया और अन्य संभावित रूप से हानिकारक डिजिटल सेवाओं से बचाने के लिए उम्र के अनुसार चरणबद्ध और सीमित पहुंच की सिफारिशों पर विचार किया था।

प्रस्ताव के अगले चरण में क्या होगा?

यूरोपीय आयोग की ओर से EU Kids Act का औपचारिक प्रस्ताव 17 सितंबर को पेश किया जाना है। इसके बाद प्रस्ताव को यूरोपीय संघ की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सदस्य देशों और यूरोपीय संसद के बीच चर्चा के बाद ही इसके अंतिम स्वरूप और कानूनी प्रावधान तय होंगे। इसलिए फिलहाल 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कोई लागू यूरोपीय संघ-व्यापी प्रतिबंध नहीं है।

सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव

यदि प्रस्तावित नियम कानून का रूप लेते हैं, तो सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र सत्यापन, अभिभावकीय नियंत्रण, सुरक्षित डिजाइन और बच्चों के लिए सीमित फीचर्स जैसी व्यवस्थाएं लागू करनी पड़ सकती हैं।

इससे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्मों के लिए यूरोपीय बाजार में बच्चों से संबंधित अपनी नीतियों और तकनीकी प्रणालियों में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। Reuters के अनुसार, व्यापक EU योजना में सोशल मीडिया के अलावा वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म, AI चैटबॉट और ऑनलाइन गेमिंग सेवाओं पर भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है।

वॉन डेर लेयेन का यह प्रस्ताव यूरोप में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती बहस के बीच आया है। अब इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि EU Kids Act का अंतिम कानूनी स्वरूप क्या रहता है और सदस्य देश तथा यूरोपीय संसद इसके प्रावधानों पर किस तरह सहमति बनाते हैं।

Bharat Baani Bureau

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