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16 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिका के साथ जारी व्यापार युद्ध से उनका देश कमजोर होकर नहीं, बल्कि “और मजबूत, अधिक लचीला और अधिक स्वतंत्र” होकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि कनाडा अब अपनी अर्थव्यवस्था और व्यापार को केवल अमेरिकी बाजार पर निर्भर रखने के बजाय दुनिया के दूसरे हिस्सों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्नी ने यह बात टोरंटो में आयोजित Canada Investment Summit में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है और कनाडा ने इस बदलाव को जल्दी पहचानकर घरेलू आर्थिक क्षमता बढ़ाने तथा विदेशों में व्यापारिक साझेदारियों का विस्तार करने की रणनीति अपनाई है।

अमेरिका पर निर्भरता घटाने की रणनीति

कार्नी ने कहा कि कनाडा अब अपनी आर्थिक भविष्य की योजना पुराने अमेरिकी संबंधों की वापसी की उम्मीद पर आधारित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश को अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और नए व्यापारिक बाजार विकसित करने पर ध्यान देना होगा।

कनाडा सरकार पहले ही अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच यूरोप और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कार्नी इस सप्ताह यूरोप की यात्रा पर भी हैं, जहां वह यूरोपीय संघ के साथ व्यापार, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं।

कार्नी का लक्ष्य अगले दशक में गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करना है। यह रणनीति कनाडा की अर्थव्यवस्था में अमेरिकी बाजार की मौजूदा बड़ी हिस्सेदारी को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

निवेश आकर्षित करने पर जोर

ट्रेड वॉर के बीच कनाडा सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 15 सितंबर को आयोजित पहले Canada Investment Summit में सरकार ने करीब 500 अरब कनाडाई डॉलर के नए निवेश से जुड़े समझौतों और घोषणाओं की जानकारी दी। सरकार का व्यापक लक्ष्य देश में लगभग 1 ट्रिलियन कनाडाई डॉलर का नया निवेश आकर्षित करना है।

कार्नी ने निवेशकों से कहा कि कनाडा के पास ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, बुनियादी ढांचे, तकनीक और कुशल कार्यबल जैसे ऐसे संसाधन हैं, जिनके आधार पर वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

सरकार ने नई पूंजीगत परियोजनाओं के लिए कर प्रोत्साहन बढ़ाने और बड़े प्रोजेक्ट्स की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने की योजना भी सामने रखी है। रॉयटर्स के अनुसार, कार्नी सरकार ने Productivity Mega Deduction नामक स्थायी टैक्स प्रोत्साहन की घोषणा की है, जिसके तहत कनाडाई कंपनियां नई पूंजीगत निवेश का बड़ा हिस्सा तुरंत राइट ऑफ कर सकेंगी।

कनाडा-ईयू संबंधों पर भी नजर

अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने के बाद कनाडा यूरोपीय संघ के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को भी गहरा करना चाहता है। कार्नी ने यूरोप के साथ संभावित “unique alliance” की बात कही है।

प्रस्तावित सहयोग में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच पहले से Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) लागू है, लेकिन ओटावा अब इससे आगे व्यापक रणनीतिक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।

अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खुला

हालांकि कार्नी ने अमेरिकी बाजार से दूरी बनाने की रणनीति पर जोर दिया है, लेकिन कनाडा ने वॉशिंगटन के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं की है। कनाडाई सरकार का कहना है कि वह ऐसा व्यापार समझौता चाहती है जो कनाडाई श्रमिकों और कारोबारों की सुरक्षा करे तथा देश की संप्रभुता को बनाए रखे।

अगस्त में कार्नी ने कहा था कि कनाडा एक ऐसे समझौते से पीछे हट गया है जिसे वह अपने हितों के लिए खराब मानता था। उन्होंने साथ ही कहा कि देश घरेलू ताकत बढ़ाकर और व्यापारिक संबंधों में विविधता लाकर नई दिशा तय कर सकता है।

घरेलू बाजार और आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव

अमेरिकी व्यापार नीतियों के असर के बीच कनाडा में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने की मुहिम भी तेज हुई है। कई कनाडाई कंपनियां अमेरिकी उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाश रही हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, कनाडाई खुदरा कंपनियां घरेलू उत्पादों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ स्पेन और ब्राजील जैसे देशों से भी वैकल्पिक आयात स्रोत तलाश रही हैं। इससे कनाडा की आपूर्ति श्रृंखलाओं में लंबे समय के बदलाव की संभावना पर चर्चा तेज हुई है।

आगे की राह

कार्नी सरकार का कहना है कि व्यापार युद्ध ने कनाडा को अपनी आर्थिक कमजोरियों पर पुनर्विचार करने का अवसर दिया है। सरकार अब घरेलू निवेश, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक में निवेश बढ़ाने के साथ नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है और दोनों देशों के बीच गहरे कारोबारी संबंधों को तेजी से बदलना आसान नहीं होगा। ऐसे में कार्नी की रणनीति का अगला चरण एक तरफ अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखना और दूसरी तरफ कनाडा की अर्थव्यवस्था को अधिक विविध और कम निर्भर बनाना है।

Bharat Baani Bureau

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