17 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। किताबें, पत्रिकाएं, कॉमिक्स या डिजिटल सामग्री सिर्फ समय बिताने का जरिया नहीं हैं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की नई समीक्षा के अनुसार, मनोरंजन के लिए पढ़ना बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, अधिक सहानुभूति और डिमेंशिया के कम जोखिम से जुड़ा हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पढ़ने की आदत जीवन के अलग-अलग चरणों में मस्तिष्क, संज्ञानात्मक क्षमता और समग्र कल्याण को समर्थन दे सकती है।
यह समीक्षा 15 सितंबर 2026 को Psychological Medicine में प्रकाशित हुई। इसमें कैम्ब्रिज के मनोचिकित्सा विभाग की प्रोफेसर बारबरा सहाकियन, डॉ. क्रिस्टेल लैंगली और द क्वीन’s रीडिंग रूम की सीईओ विकी पेरिन ने पढ़ने और मस्तिष्क स्वास्थ्य से जुड़े उपलब्ध शोधों का विश्लेषण किया।
पढ़ना तनाव और अकेलेपन को कम करने में मददगार
समीक्षा के मुताबिक, वयस्कों में पढ़ने की आदत कम तनाव, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और अधिक सहानुभूति से जुड़ी पाई गई है। पढ़ना व्यक्ति को रोजमर्रा की चिंताओं से कुछ समय के लिए दूर होने, दूसरे लोगों के नजरिए को समझने और भावनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर दे सकता है।
2025 में प्रकाशित एक अलग व्यवस्थित समीक्षा में भी शोधकर्ताओं ने पाया था कि मनोरंजन के लिए पढ़ने से लोगों को दैनिक तनाव से दूरी बनाने, सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाने, आत्म-समझ विकसित करने और दूसरों के साथ जुड़ाव मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
डिमेंशिया के जोखिम से संबंध
कैम्ब्रिज शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से उन अध्ययनों पर ध्यान दिया जिनमें पढ़ने जैसी संज्ञानात्मक रूप से सक्रिय गतिविधियों और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली संज्ञानात्मक गिरावट के बीच संबंध देखा गया था।
समीक्षा में शामिल दीर्घकालिक अध्ययनों से संकेत मिलता है कि पढ़ने जैसी गतिविधियां धीमी संज्ञानात्मक गिरावट और डिमेंशिया के कम जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रभाव अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले लोगों में भी देखा गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने इसे डिमेंशिया से बचाव की गारंटी नहीं बताया है। उपलब्ध शोध मुख्य रूप से संबंध दर्शाता है और यह निश्चित रूप से साबित नहीं करता कि केवल पढ़ने की आदत ही डिमेंशिया के जोखिम में कमी का कारण है।
मस्तिष्क के लिए लगातार चुनौती
पढ़ने के दौरान व्यक्ति को शब्दों को पहचानने, उनका अर्थ समझने, जानकारी को याद रखने और अलग-अलग विचारों के बीच संबंध बनाने की जरूरत होती है। इस तरह की मानसिक गतिविधियां मस्तिष्क को सक्रिय रखती हैं और उम्र बढ़ने के साथ संज्ञानात्मक क्षमता बनाए रखने में योगदान दे सकती हैं।
कैम्ब्रिज समीक्षा में न्यूरोइमेजिंग शोधों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें पढ़ने की गतिविधि और मस्तिष्क के उन क्षेत्रों के बीच संबंध पाया गया जो कार्यकारी नियंत्रण, भावनात्मक नियंत्रण और सामाजिक समझ से जुड़े हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि लगातार मानसिक गतिविधियां cognitive reserve, यानी मस्तिष्क की ऐसी क्षमता जो उम्र या बीमारी के बावजूद कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद कर सकती है, को मजबूत करने में भूमिका निभा सकती हैं।
बच्चों के लिए भी फायदे
पढ़ने के फायदे केवल बुजुर्गों या वयस्कों तक सीमित नहीं हैं। समीक्षा के अनुसार, बचपन और किशोरावस्था में मनोरंजन के लिए पढ़ने को बेहतर ध्यान, स्मृति, कार्यकारी क्षमता और शैक्षणिक उपलब्धि से जोड़ा गया है।
इसके अलावा, शुरुआती उम्र में पढ़ने की आदत को कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कम होने से भी जोड़ा गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना उनके लंबे समय के संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास के लिए उपयोगी हो सकता है।
अकेले पढ़ने के साथ सामूहिक पढ़ाई भी उपयोगी
शोधकर्ताओं ने केवल व्यक्तिगत पढ़ने के फायदे पर जोर नहीं दिया है। बुक क्लब, साझा पठन और माता-पिता द्वारा बच्चों के साथ पढ़ने जैसी गतिविधियां सामाजिक संपर्क को बढ़ा सकती हैं।
साझा पढ़ने से लोगों को अपने अनुभवों पर चर्चा करने, दूसरों के दृष्टिकोण समझने और सामाजिक जुड़ाव बनाने का अवसर मिलता है। इससे अकेलेपन की भावना कम करने में भी मदद मिल सकती है।
किताब ही जरूरी नहीं
शोधकर्ताओं के अनुसार, मनोरंजन के लिए पढ़ने का मतलब केवल पारंपरिक मुद्रित किताबें पढ़ना नहीं है। ई-बुक, पत्रिकाएं, कॉमिक्स, ग्राफिक नॉवेल और अन्य डिजिटल सामग्री भी पढ़ने की इसी व्यापक श्रेणी में आती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति स्वेच्छा और आनंद के लिए पढ़ने में सक्रिय रूप से शामिल हो।
कैम्ब्रिज के शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि पढ़ना एक अपेक्षाकृत आसान और कम लागत वाली गतिविधि है, जिसे अलग-अलग उम्र के लोगों की दैनिक जिंदगी में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, डिमेंशिया की रोकथाम के संदर्भ में पढ़ने की भूमिका को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर, नई समीक्षा इस बात के बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों को रेखांकित करती है कि मनोरंजन के लिए नियमित पढ़ना मस्तिष्क स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और सामाजिक जुड़ाव के लिए उपयोगी हो सकता है, जबकि लंबे समय में संज्ञानात्मक गिरावट और डिमेंशिया के कम जोखिम से भी इसका संबंध देखा गया है।
