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22 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में कर्ज और जमा वृद्धि दोनों में तेजी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त को समाप्त पखवाड़े में बैंक क्रेडिट वृद्धि 19.1 प्रतिशत रही, जबकि जमा वृद्धि बढ़कर 17.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा यानी FCNR(B) के जरिए बड़ी मात्रा में धन जुटाए जाने से बैंकों की फंडिंग स्थिति मजबूत हुई है और कर्ज-जमा वृद्धि के बीच का अंतर भी काफी कम हुआ है।

जमा वृद्धि में 15 साल का उच्च स्तर

बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि 17.8 प्रतिशत तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त को समाप्त पखवाड़े में बैंकों की जमा राशि में करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जबकि बैंक क्रेडिट में लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया। इस दौरान कुल क्रेडिट-जमा अनुपात घटकर 80.32 प्रतिशत रह गया, जो इससे पिछले स्तर 81.72 प्रतिशत था।

जमा वृद्धि में इस तेजी का प्रमुख कारण RBI की विशेष FCNR(B) जमा योजना रही। इस योजना के तहत बैंकों ने अनिवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा में जमा जुटाई। RBI की ओर से उपलब्ध कराई गई स्वैप सुविधा ने बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा को रुपये की तरलता में बदलने में मदद की, जिससे बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध धनराशि बढ़ी।

कर्ज वृद्धि में कॉरपोरेट और उद्योग क्षेत्र की भूमिका

बैंक क्रेडिट वृद्धि लगभग 19 प्रतिशत तक पहुंचने के पीछे कॉरपोरेट और औद्योगिक ऋण की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। जुलाई में उद्योग क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बड़े उद्योगों का क्रेडिट लगभग 18 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मध्यम उद्योगों के ऋण में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में भी 22.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बुनियादी ढांचे, धातु एवं धातु उत्पाद, इंजीनियरिंग, रसायन, पेट्रोलियम और कपड़ा उद्योग जैसे क्षेत्रों में ऋण मांग मजबूत रही।

बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू बॉन्ड बाजार में अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरों के कारण कई कंपनियां अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए बैंक ऋण का रुख कर रही हैं। इससे कॉरपोरेट लोन बुक में वृद्धि को समर्थन मिल रहा है।

बैंकों के पास बढ़ी तरलता, ऋण दरों पर असर की संभावना

FCNR(B) जमा के जरिए बैंकों के पास बड़ी मात्रा में अतिरिक्त तरलता आई है। इस कारण बैंक कॉरपोरेट ग्राहकों को ऋण देने के लिए अधिक संसाधनों की स्थिति में हैं। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि अतिरिक्त धनराशि का उपयोग उच्च लागत वाली थोक जमा को बदलने या नए ऋण देने में किया जा सकता है।

अतिरिक्त तरलता के कारण कुछ बैंक कॉरपोरेट ग्राहकों को अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों पर ऋण देने की कोशिश कर सकते हैं। इससे कंपनियों की उधारी लागत में कमी आ सकती है, विशेषकर उन कंपनियों के लिए जिनकी क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है।

हालांकि, बैंक अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि ऋण की कीमत कम करने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद बैंक क्रेडिट गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहेंगे। कमजोर ऋण मानकों के कारण भविष्य में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी NPA का जोखिम बढ़ सकता है।

Jefferies का आर्थिक गतिविधियों में सुधार का संकेत

ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने भारत में बैंक क्रेडिट वृद्धि की तेज गति को घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संभावित संकेत के रूप में देखा है। Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड ने 21 सितंबर को Jefferies India Forum में कहा कि भारत में क्रेडिट वृद्धि लगभग 18–19 प्रतिशत की दर से चल रही है, जो छह महीने पहले की अपेक्षाओं से काफी बेहतर है।

Jefferies के अनुसार, तेज बैंक ऋण वृद्धि से निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय यानी प्राइवेट कैपेक्स में सुधार की उम्मीद बढ़ सकती है। यदि कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई परियोजनाएं शुरू करने और बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए बैंक ऋण का उपयोग करती हैं, तो इसका असर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार पर पड़ सकता है।

हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड यील्ड अब भी महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। Jefferies ने घरेलू विकास के सकारात्मक संकेतों के साथ-साथ इन बाहरी चुनौतियों पर भी ध्यान देने की बात कही है।

आगे कर्ज वृद्धि में सामान्यीकरण संभव

Jefferies की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत की घरेलू क्रेडिट वृद्धि मार्च 2027 तक लगभग 15 प्रतिशत तक सामान्य हो सकती है। वर्तमान में वृद्धि करीब 18 प्रतिशत के आसपास रहने के बावजूद ऊंचे आधार प्रभाव के कारण आने वाले महीनों में रफ्तार कम हो सकती है।

ब्रोकरेज के अनुसार, बैंकों के विदेशी परिचालन से कुल क्रेडिट वृद्धि को अतिरिक्त 3–4 प्रतिशत अंक का समर्थन मिल सकता है। जमा वृद्धि पहले लगभग 17 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, लेकिन मार्च 2027 तक इसके 15–16 प्रतिशत के स्तर पर सामान्य होने की संभावना जताई गई है।

इस अनुमान से संकेत मिलता है कि वर्तमान में बैंकिंग क्षेत्र में दिख रही तेजी का एक हिस्सा विशेष FCNR(B) जमा प्रवाह और आधार प्रभाव से जुड़ा है। इसलिए बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन का आकलन करते समय ऋण वृद्धि के साथ-साथ जमा की स्थिरता, ऋण की गुणवत्ता और ब्याज मार्जिन पर भी नजर रखना जरूरी होगा।

RBI के सामने तरलता प्रबंधन की चुनौती

FCNR(B) योजना के तहत बड़े पैमाने पर धन आने से बैंकिंग प्रणाली में तरलता का अधिशेष बढ़ा। RBI ने अतिरिक्त धनराशि को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों, जिनमें वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी और खुले बाजार में बॉन्ड बिक्री शामिल हैं, का इस्तेमाल किया है।

अत्यधिक तरलता से अल्पकालिक ब्याज दरों और ऋण मूल्य निर्धारण पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि RBI अतिरिक्त धनराशि को अधिक मात्रा में अवशोषित करता है, तो बैंकों के पास ऋण विस्तार के लिए उपलब्ध संसाधनों में कमी आ सकती है।

इस प्रकार, बैंक क्रेडिट वृद्धि का आगे का रुझान ऋण मांग, जमा प्रवाह, RBI की तरलता नीति, वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा। वर्तमान आंकड़े बैंकिंग क्षेत्र में मजबूत ऋण विस्तार और जमा स्थिति में सुधार का संकेत देते हैं, लेकिन इन आंकड़ों में FCNR(B) प्रवाह के अस्थायी प्रभाव को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

Bharat Baani Bureau

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