12 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि राज्य सरकार धान खरीद के दौरान किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को अपनी फसल बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और मंडी से घर पहुंचने से पहले ही उनके बैंक खातों में पैसे पहुंचाने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत का उचित मूल्य समय पर मिलना जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि खरीद, फसल उठान और भुगतान की प्रक्रिया सुचारु रहे, ताकि किसानों को मंडियों में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
धान खरीद के साथ भुगतान पर जोर
पंजाब में खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू हुई है। राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने और किसानों को समय पर भुगतान करने का भरोसा दिया है।
5 अक्टूबर को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक ने बताया था कि राज्य की मंडियों में 3.83 लाख मीट्रिक टन धान पहुंचा था, जिसमें से सरकारी एजेंसियां 3.44 लाख मीट्रिक टन की खरीद कर चुकी थीं। उस समय तक किसानों को खरीदे गए धान के बदले 188 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था।
सरकार का कहना है कि खरीद और भुगतान की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के बाद भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
किसानों के लिए समय पर भुगतान क्यों अहम?
धान की कटाई और बिक्री के मौसम में किसानों को मजदूरी, डीजल, परिवहन, कृषि उपकरणों और अगली फसल की तैयारी पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे में खरीदी गई उपज का भुगतान समय पर मिलना उनके नकदी प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण है।
यदि भुगतान में देरी होती है, तो किसानों को दैनिक खर्चों और अगली कृषि गतिविधियों के लिए अतिरिक्त कर्ज लेना पड़ सकता है। समय पर भुगतान मिलने से वे अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करने और अगली फसल की तैयारी करने में अधिक आसानी महसूस कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री का बयान इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि धान खरीद के दौरान किसानों की प्रमुख अपेक्षाओं में उचित मूल्य, समय पर खरीद, फसल का जल्द उठान और बैंक खातों में भुगतान शामिल हैं।
मंडियों में खरीद और उठान की व्यवस्था
सरकार ने धान खरीद के साथ मंडियों से अनाज उठाने की प्रक्रिया तेज करने पर भी जोर दिया है। खरीद के बाद धान का समय पर उठान जरूरी है, ताकि मंडियों में नई फसल लाने वाले किसानों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रहे।
हालांकि, इस सीजन में पंजाब के सामने भंडारण स्थान की कमी भी एक चुनौती बनी हुई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से राज्य में जमा पुराने खाद्यान्न के स्टॉक को जल्द हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने 10 अक्टूबर तक 6 लाख मीट्रिक टन चावल और अक्टूबर के दौरान 15 लाख मीट्रिक टन गेहूं की निकासी की मांग उठाई थी, ताकि नई फसल के लिए जगह बनाई जा सके।
भंडारण की पर्याप्त जगह उपलब्ध होने से मंडियों में धान की आवक, सरकारी खरीद और अनाज के परिवहन को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
किसानों को परेशानी से बचाने का दावा
पंजाब सरकार ने कहा है कि खरीद प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने भी मंडियों का दौरा कर खरीद, उठान, भुगतान और बोरियों की उपलब्धता की समीक्षा की है।
दूसरी ओर, हाल की बारिश ने राज्य की कुछ मंडियों में खरीद व्यवस्था को प्रभावित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, फाजिल्का सहित कई इलाकों में पानी भरने से धान भीगने और मंडी संचालन में बाधा आने की शिकायतें सामने आई हैं।
ऐसे हालात में समय पर खरीद और भुगतान के साथ फसल को बारिश से बचाने, पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने और अनाज का तेजी से उठान सुनिश्चित करने की जरूरत भी बढ़ गई है।
भुगतान व्यवस्था पर किसानों की नजर
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के बयान से किसानों को समय पर भुगतान का आश्वासन मिला है। अब किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि खरीद सीजन के दौरान भुगतान कितनी तेजी से खातों में पहुंचता है और मंडियों में खरीद तथा उठान की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि धान की बढ़ती आवक के बीच खरीद, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखा जाए। किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यही होगा कि उनकी उपज की सरकारी खरीद समय पर हो और उसका भुगतान बिना अनावश्यक देरी के उनके बैंक खातों में पहुंचे।
