22  जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : बचपन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) का अधिक सेवन शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया में बदलाव से जुड़ा हो सकता है। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बचपन के आहार और शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों की जांच की है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में आमतौर पर पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट, पैकेज्ड बेकरी उत्पाद और ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जिनमें कई औद्योगिक सामग्री, अधिक चीनी, नमक या अस्वास्थ्यकर वसा हो सकती है।

इंसुलिन प्रतिक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?

इंसुलिन एक हार्मोन है, जो शरीर को रक्त में मौजूद ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद करता है। भोजन के बाद शरीर में इंसुलिन की प्रतिक्रिया में बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर ब्लड शुगर को किस तरह नियंत्रित कर रहा है।

अध्ययन में बचपन के दौरान अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेवन और बाद में देखी गई इंसुलिन प्रतिक्रियाओं के बीच संबंध पाया गया। हालांकि, शोधकर्ताओं ने ऐसे अध्ययनों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया कि केवल इस संबंध के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड सीधे तौर पर इंसुलिन में बदलाव का कारण बनता है।

बच्चों के आहार पर ध्यान जरूरी

बचपन शरीर के विकास और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञ आमतौर पर बच्चों के आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन और कम से कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह देते हैं।

क्या अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पूरी तरह बंद करना जरूरी है?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी एक खाद्य पदार्थ को लेकर डरने के बजाय पूरे आहार की गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। बच्चों के भोजन में पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा सीमित करना और संतुलित, पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है।

बच्चों के आहार या ब्लड शुगर से जुड़ी विशेष चिंताओं के मामले में डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

Bharat Baani Bureau

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