10 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : बदलती खान-पान की आदतों और शहरी जीवनशैली के बीच बेंगलुरु के बच्चों में इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) के मामले बढ़ने की चिंता सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की डाइट, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ता तनाव आंतों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
IBS एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट दर्द, गैस, सूजन, दस्त या कब्ज जैसी समस्याएं बार-बार हो सकती हैं। हालांकि यह आमतौर पर आंतों को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन इसके लक्षण बच्चों की रोजमर्रा की गतिविधियों और पढ़ाई को प्रभावित कर सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, शहरी परिवारों में प्रोसेस्ड और फास्ट फूड, मीठे पेय और फाइबर की कमी वाली डाइट का चलन बढ़ा है। इसके साथ ही स्क्रीन टाइम बढ़ने और शारीरिक गतिविधि कम होने से भी बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ बच्चों के भोजन में फल, सब्जियां और पर्याप्त फाइबर शामिल करने, नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और पर्याप्त नींद लेने पर जोर देते हैं। साथ ही, बच्चों में लगातार पेट दर्द या आंतों से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही गई है।
चिकित्सकों का कहना है कि हर बच्चे में पेट की समस्या का कारण IBS नहीं होता। इसलिए खुद से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय उचित चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
