13 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :कैंसर के इलाज में दवा की सही मात्रा के साथ-साथ उसे किस समय दिया जाए, यह भी भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी विचार पर आधारित क्षेत्र को सर्केडियन ऑन्कोलॉजी (Circadian Oncology) कहा जाता है।

सर्केडियन रिदम शरीर की लगभग 24 घंटे की जैविक घड़ी है, जो नींद-जागने के चक्र, हार्मोन, चयापचय और कई अन्य जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन प्रक्रियाओं में होने वाले बदलाव कैंसर कोशिकाओं और स्वस्थ कोशिकाओं के दवाओं के प्रति प्रतिक्रिया करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं।

इलाज का समय क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?

कैंसर की कुछ दवाएं तेजी से विभाजित होने वाली कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं। शरीर की सामान्य कोशिकाएं भी दिन के अलग-अलग समय पर दवाओं के प्रति अलग संवेदनशीलता दिखा सकती हैं। इसलिए क्रोनोथेरेपी (Chronotherapy) का उद्देश्य उपचार को ऐसे समय पर देना है, जब कैंसर कोशिकाओं पर असर अधिक और स्वस्थ ऊतकों पर नुकसान अपेक्षाकृत कम हो।

हालांकि, हर कैंसर और हर मरीज के लिए एक ही समय को आदर्श नहीं माना जा सकता। ट्यूमर का प्रकार, उपचार की दवा, मरीज की जैविक घड़ी और अन्य व्यक्तिगत कारक परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

मरीजों के परिणामों पर संभावित असर

सर्केडियन ऑन्कोलॉजी का लक्ष्य उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने और दुष्प्रभावों को कम करना है। यदि उपचार का सही समय व्यक्तिगत रूप से निर्धारित किया जा सके, तो भविष्य में कैंसर थेरेपी को और अधिक पर्सनलाइज्ड बनाया जा सकता है।

फिलहाल यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसके कई पहलुओं को बड़े क्लिनिकल अध्ययनों में और समझने की जरूरत है। मरीजों को अपने कैंसर उपचार का समय स्वयं बदलने के बजाय हमेशा अपने ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह का पालन करना चाहिए।

Bharat Baani Bureau

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