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4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब की राजनीति में कथित रिश्वतखोरी और मामलों को पैसे के जरिए निपटाने के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गुरुवार को पंजाब सरकार पर एक कथित “करप्शन सिंडिकेट” चलाने का आरोप लगाया, जिसमें बिचौलियों के जरिए बलात्कार और अन्य आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए कथित तौर पर बड़ी रकम मांगे जाने का दावा किया गया है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक मामले में कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये तक की रिश्वत मांगे जाने का आरोप लगाया।

BJP ने आरोपों के समर्थन में कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स का भी हवाला दिया। पार्टी के मुताबिक, इन रिकॉर्डिंग्स में कुछ बिचौलियों को मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनकी पत्नी की कथित भूमिका का जिक्र करते हुए सुना जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री से इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और कथित ऑडियो की प्रामाणिकता तथा उसमें कही गई बातों की जांच की आवश्यकता होगी।

BJP का ‘मिडिलमैन मॉडल’ का आरोप

दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि पंजाब में मामलों को प्रभावित करने के लिए एक “middleman model” काम कर रहा है। उनके अनुसार, बिचौलियों के जरिए आरोपियों या उनके परिजनों से पैसे की बातचीत की जा रही थी और दावा किया जा रहा था कि रकम देने पर FIR वापस कराने या मामले को “सेटल” कराने में मदद की जा सकती है।

BJP ने इन आरोपों को एक कथित मामले से जोड़ते हुए FIR नंबर 77 का उल्लेख किया, जो सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में दर्ज है। BJP के अनुसार, मामला गुरविंदर चहल नामक आरोपी से संबंधित है। पार्टी ने दावा किया कि एक कथित रिकॉर्डिंग में एक बिचौलिए ने आरोपी के रिश्तेदार से कहा कि मुख्यमंत्री को मामले की जानकारी है और इसे खत्म कराया जा सकता है।

एक अन्य कथित रिकॉर्डिंग में BJP ने करीब 5 करोड़ रुपये की रकम को लेकर बातचीत होने का दावा किया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कथित रकम को कई लोगों के बीच बांटने की बात हुई थी।

आरोपी को जमानत मिलने से जोड़ा मामला

BJP ने कथित बातचीत को आरोपी को बाद में मिली जमानत से जोड़ने की कोशिश की। पार्टी के मुताबिक, संबंधित आरोपी को 13 मई को गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे जमानत मिल गई।

हालांकि, केवल किसी आरोपी को जमानत मिलने से कथित रिश्वतखोरी के आरोप स्वतः साबित नहीं होते। ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए जांच एजेंसियों को रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच, वित्तीय लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जैसे पहलुओं की जांच करनी होगी।

BJP ने मांगी केंद्रीय एजेंसी से जांच

BJP ने मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि आरोप सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO के कामकाज से जुड़े हैं, इसलिए पंजाब सरकार की किसी एजेंसी से जांच कराने के बजाय स्वतंत्र केंद्रीय जांच जरूरी है।

BJP ने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी तंत्र और प्रभावशाली लोगों के बीच कथित सांठगांठ का गंभीर मामला बन जाएगा।

AAP ने आरोपों को बताया चरित्र हनन

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ AAP ने BJP के आरोपों को खारिज करते हुए इसे “smear campaign” और व्यक्तिगत हमले का हिस्सा बताया है। AAP के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने BJP और शिरोमणि अकाली दल (SAD) पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की छवि खराब करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

पन्नू ने कहा कि विपक्ष के पास पंजाब सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने के लिए ठोस मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह व्यक्तिगत आरोपों और चरित्र हनन का सहारा ले रहा है। उन्होंने BJP और SAD नेताओं से कहा कि यदि वे संबंधित लोगों को जानते हैं तो पहले अपने राजनीतिक संबंधों को लेकर सवालों का जवाब दें।

AAP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित बिचौलियों की BJP और SAD नेताओं के साथ तस्वीरें भी दिखाईं। पन्नू ने BJP नेताओं जेपी नड्डा, मनजिंदर सिंह सिरसा और रवनीत सिंह बिट्टू के साथ एक कथित बिचौलिए की तस्वीरों का उल्लेख किया। इसी तरह उन्होंने आरोपी गुरविंदर चहल की सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया के साथ तस्वीरों का हवाला दिया।

AAP का कहना है कि इन तस्वीरों से यह साबित होता है कि जिन लोगों को विपक्ष अब बिचौलियों के रूप में पेश कर रहा है, वे BJP और अकाली नेतृत्व के लिए भी पूरी तरह अपरिचित नहीं थे।

SAD ने भी CBI जांच की मांग की

इसी विवाद के बीच शिरोमणि अकाली दल ने भी पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर मुख्यमंत्री कार्यालय में कथित बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मामले का संज्ञान लेने और CBI जांच कराने की मांग रखी। अकाली दल का कहना है कि आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

आरोपों की जांच से ही साफ होगी तस्वीर

मामले में फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं, लेकिन BJP द्वारा सामने रखी गई कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और उनके आधार पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। रिकॉर्डिंग्स की वास्तविकता, आवाजों की पहचान और बातचीत के संदर्भ की फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

इसके साथ ही कथित रिश्वत की रकम से जुड़े किसी भी वित्तीय लेनदेन की जांच यह स्पष्ट करने में मदद कर सकती है कि क्या वास्तव में पैसे की मांग या भुगतान हुआ था।

फिलहाल पंजाब में BJP, AAP और SAD के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान जारी है। BJP जहां इसे सरकार के कथित ‘भ्रष्टाचार सिंडिकेट’ का प्रमाण बता रही है, वहीं AAP इसे मुख्यमंत्री और सरकार की छवि खराब करने के लिए चलाया जा रहा राजनीतिक अभियान करार दे रही है। अब इस विवाद की दिशा काफी हद तक जांच और उपलब्ध सबूतों की सत्यता पर निर्भर करेगी।

Bharat Baani Bureau

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