25 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। भारत के पूंजी बाजारों के लिए आने वाले वर्षों में मजबूत संरचनात्मक वृद्धि की संभावना जताई गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी के अनुसार, घरेलू बचत का धीरे-धीरे नकदी और बैंक जमा से निकलकर बाजार आधारित वित्तीय उत्पादों की ओर बढ़ना भारत के कैपिटल मार्केट्स के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
मैक्वायरी की हालिया रिपोर्ट “India Capital Markets: A Powerful $500bn Flywheel” के अनुसार, भारत के निवेश, वेल्थ मैनेजमेंट और एक्सचेंज से जुड़े संयुक्त रेवेन्यू पूल में वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2030 के बीच लगभग 16 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज हो सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, यह वृद्धि डिजिटल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म, स्टॉक एक्सचेंज, कमोडिटी एक्सचेंज और अन्य बाजार अवसंरचना कंपनियों के लिए अवसरों का विस्तार कर सकती है।
करीब 50% वित्तीय बचत अभी भी नकदी और जमा में
मैक्वायरी की रिपोर्ट का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि भारत में घरेलू वित्तीय बचत का लगभग आधा हिस्सा अभी भी नकदी और बैंक जमा के रूप में मौजूद है। यदि इसका बढ़ता हिस्सा इक्विटी, म्यूचुअल फंड, बीमा, बॉन्ड और अन्य बाजार-आधारित उत्पादों की ओर जाता है, तो इससे पूंजी बाजारों में निवेश का आधार और व्यापक हो सकता है।
ब्रोकरेज ने भारत के पूंजी बाजारों में दीर्घकालिक बदलाव को तीन प्रमुख प्रक्रियाओं से जोड़ा है—फाइनेंशियलाइजेशन, इक्विटाइजेशन और प्रोडक्टाइजेशन।
फाइनेंशियलाइजेशन का अर्थ है कि अधिक घरेलू बचत औपचारिक वित्तीय उत्पादों में प्रवेश करे। इक्विटाइजेशन के तहत निवेशकों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ती है, जबकि प्रोडक्टाइजेशन का मतलब निवेशकों को अधिक विविध वित्तीय एवं निवेश उत्पाद उपलब्ध कराना है।
निवेश और वेल्थ रेवेन्यू पूल ₹1.2 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.2 लाख करोड़
मैक्वायरी का अनुमान है कि भारत का निवेश और वेल्थ रेवेन्यू पूल वित्त वर्ष 2026 के लगभग ₹1.2 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक करीब ₹2.2 लाख करोड़ हो सकता है। यह लगभग 16 प्रतिशत CAGR के बराबर है।
रिटेल ब्रोकिंग सेगमेंट के लिए ब्रोकरेज ने लगभग 17 प्रतिशत की सालाना वृद्धि का अनुमान लगाया है। वहीं एसेट मैनेजमेंट और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन, जो मौजूदा निवेश वॉलेट का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, के भी करीब 16 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना जताई गई है।
इसका मतलब यह है कि पूंजी बाजार की वृद्धि केवल शेयरों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रह सकती। म्यूचुअल फंड, वेल्थ मैनेजमेंट, मार्जिन ट्रेडिंग, लेंडिंग, कमोडिटी और अन्य निवेश उत्पाद भी इस विस्तार में योगदान दे सकते हैं।
एक्सचेंज कारोबार में भी मजबूत विस्तार की संभावना
मैक्वायरी के अनुसार, भारत का एक्सचेंज रेवेन्यू पूल वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 12-14 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ सकता है। ट्रांजैक्शन आधारित रेवेन्यू के करीब 12 प्रतिशत और गैर-ट्रांजैक्शन उत्पादों के लगभग 15 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
ब्रोकरेज का मानना है कि डेटा, कनेक्टिविटी, लिस्टिंग और इंडेक्स से जुड़े उत्पादों का बढ़ता योगदान एक्सचेंज कारोबार को केवल ट्रेडिंग वॉल्यूम पर निर्भर रहने से आगे ले जा सकता है।
NSE, BSE और MCX पर मैक्वायरी की नजर
मैक्वायरी ने भारत के प्रमुख कैपिटल मार्केट कारोबारों को लेकर अलग-अलग कंपनियों पर कवरेज भी शुरू की है। रिपोर्ट में Groww, BSE, MCX और NSE को ‘Outperform’ रेटिंग दी गई है, जबकि Angel One को ‘Neutral’ रेटिंग दी गई है। यह रेटिंग मैक्वायरी के विश्लेषण का हिस्सा है और निवेशकों के लिए स्वतंत्र निवेश सलाह नहीं मानी जानी चाहिए।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के लिए मैक्वायरी ने वित्त वर्ष 2026-30 के बीच लगभग 12 प्रतिशत रेवेन्यू CAGR का अनुमान लगाया है। ब्रोकरेज के अनुसार, नए उत्पादों, गैर-ट्रांजैक्शन रेवेन्यू और भारत में बढ़ते वित्तीयकरण से NSE को लाभ मिल सकता है।
वहीं MCX के लिए वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच करीब 19 प्रतिशत रेवेन्यू CAGR का अनुमान लगाया गया है। मैक्वायरी ने भारत में कमोडिटी निवेश की अपेक्षाकृत कम पहुंच और MCX की कमोडिटी डेरिवेटिव्स में मजबूत स्थिति को संभावित विकास कारकों में शामिल किया है।
डिजिटल ब्रोकिंग से बढ़ेगी निवेशकों की पहुंच
भारत में मोबाइल आधारित निवेश प्लेटफॉर्म और डिजिटल ब्रोकिंग सेवाओं के विस्तार ने पूंजी बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाने में भूमिका निभाई है। मैक्वायरी का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में निवेशक केवल इक्विटी ट्रेडिंग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कमोडिटी, मार्जिन ट्रेडिंग, लेंडिंग और अन्य वित्तीय उत्पादों का इस्तेमाल भी बढ़ा सकते हैं।
Groww के लिए मैक्वायरी ने FY26-FY30 के बीच लगभग 25 प्रतिशत रेवेन्यू CAGR का अनुमान लगाया है, जिसमें नए उत्पादों और सेवाओं के विस्तार को प्रमुख कारण माना गया है।
वित्तीयकरण से जुड़ा दीर्घकालिक बदलाव
भारत की अर्थव्यवस्था में बढ़ती आय, डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार और निवेश संबंधी जागरूकता घरेलू बचत के स्वरूप को प्रभावित कर रही है। हालांकि, बैंक जमा और पारंपरिक बचत साधन अभी भी घरेलू वित्तीय संपत्तियों का बड़ा हिस्सा हैं।
मैक्वायरी का विश्लेषण इस संभावना पर आधारित है कि आने वाले वर्षों में बचत का बढ़ता हिस्सा बाजार से जुड़े उत्पादों की ओर जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इससे ब्रोकरेज, एसेट मैनेजमेंट, एक्सचेंज, वेल्थ मैनेजमेंट और अन्य पूंजी बाजार सेवाओं का दायरा बढ़ सकता है।
रिपोर्ट का व्यापक निष्कर्ष यह है कि भारत के कैपिटल मार्केट्स में वृद्धि केवल बाजार सूचकांकों या दैनिक ट्रेडिंग गतिविधियों से जुड़ी कहानी नहीं है। घरेलू बचत का वित्तीयकरण, इक्विटी में बढ़ती भागीदारी और निवेश उत्पादों की विविधता मिलकर आने वाले वर्षों में बाजार के पूरे इकोसिस्टम का आकार बढ़ा सकती है।
