3 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  CLOVES सिंड्रोम एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक (Genetic) विकार है, जिसे अक्सर अन्य बीमारियों या सामान्य शारीरिक असामान्यताओं समझ लिया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और सही इलाज के लिए इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

CLOVES सिंड्रोम का नाम इसके प्रमुख लक्षणों से मिलकर बना है, जिनमें जन्मजात वसायुक्त ऊतक (Congenital Lipomatous Overgrowth), रक्त वाहिकाओं की विकृतियां (Vascular Malformations), त्वचा में बदलाव और रीढ़ या हड्डियों की असामान्य वृद्धि शामिल हैं। यह स्थिति आमतौर पर PIK3CA जीन में होने वाले परिवर्तन (Mutation) से जुड़ी होती है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित बच्चों में शरीर के किसी हिस्से का असामान्य रूप से बड़ा होना, त्वचा पर निशान, रक्त वाहिकाओं की समस्याएं या अंगों के आकार में असंतुलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। चूंकि ये लक्षण अन्य बीमारियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं, इसलिए कई मामलों में सही निदान में देरी हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि CLOVES सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर पहचान, नियमित निगरानी और बहु-विषयक चिकित्सा (Multidisciplinary Care) के जरिए मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। कुछ मामलों में सर्जरी, दवाओं और फिजियोथेरेपी की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

डॉक्टरों ने माता-पिता और स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की है कि यदि बच्चे में जन्म से ही असामान्य वृद्धि या रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याएं दिखाई दें, तो विशेषज्ञ से परामर्श लें। जागरूकता और शीघ्र निदान से जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *