Notice: Trying to get property 'post_content' of non-object in /home/bharatbaani/htdocs/bharatbaani.com/wp-content/plugins/custom-css-js/custom-css-js.php on line 203

5 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : पंजाब सरकार ने शुक्रवार देर रात पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष आश्वासन दिया कि वह अधिवक्ता निखिल सराफ के मोहाली स्थित फार्महाउस को फिलहाल ध्वस्त करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाएगी। यह आश्वासन जस्टिस एचएस सेठी की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष हुई देर रात की सुनवाई के दौरान दिया गया। सरकार ने कहा कि फार्महाउस के संबंध में कोई भी कार्रवाई 11 सितंबर तक नहीं की जाएगी

मामला उस समय हाईकोर्ट के सामने आया जब सराफ ने अदालत का रुख करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर जनहित याचिका (PIL) दायर करने के बाद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई थी कि उनके मोहाली जिले के माजरी इलाके में स्थित फार्महाउस को गिराया जा सकता है।

हाईकोर्ट में देर रात हुई विशेष सुनवाई

सराफ की ओर से दायर आवेदन पर शुक्रवार देर रात हाईकोर्ट में तत्काल सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष डिवीजन बेंच का गठन किया गया। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि फार्महाउस से संबंधित कार्रवाई नवंबर 2024 में जारी किए गए नोटिस के आधार पर शुरू की गई थी।

सरकारी पक्ष के अनुसार, इस मामले में एक speaking order भी 2 सितंबर 2026 को पारित किया गया था। सरकार ने अदालत के समक्ष कहा कि यदि आगे कोई कार्रवाई आवश्यक हुई तो वह 11 सितंबर के बाद ही की जाएगी।

सराफ ने बाद में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन ने उनकी याचिका का मामला अदालत के सामने उठाया और विशेष बेंच का गठन कर सुनवाई की गई।

सराफ ने लगाए गंभीर आरोप

अधिवक्ता निखिल सराफ ने लगभग दो सप्ताह पहले हाईकोर्ट में एक PIL दायर की थी। इसमें उन्होंने पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों पर कई गंभीर अनियमितताओं और कथित घोटालों में शामिल होने के आरोप लगाए थे।

उनकी याचिका में कथित तौर पर “cash for transfers”, “cash for getting favourable policies” और “cash for tenders” जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया था। सराफ ने मामले की जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग भी की थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि PIL दायर करने के बाद राज्य की विभिन्न एजेंसियों की ओर से उन्हें नोटिस मिलने लगे। इन्हीं घटनाओं के बीच उनके फार्महाउस के खिलाफ जारी demolition notice ने उनकी चिंता बढ़ाई।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी अदालत के समक्ष लंबित है और संबंधित एजेंसियों तथा राज्य सरकार का पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

ED की चिट्ठी भी मामले में महत्वपूर्ण

इस पूरे विवाद का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजी गई कथित चिट्ठी है। हाईकोर्ट ने पहले ED के वकील को निर्देश दिया था कि इस मामले में पंजाब DGP को भेजे गए communications अदालत के समक्ष रखे जाएं।

रिपोर्टों के अनुसार, ED ने कथित तौर पर कुछ लोगों और सरकारी अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर FIR दर्ज करने की मांग की थी। इनमें सरकारी अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग को प्रभावित करने, सरकारी दस्तावेजों की जानकारी लीक करने और अन्य सरकारी मंजूरियों से जुड़े गंभीर आरोपों का उल्लेख बताया गया है।

इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

बार एसोसिएशन ने उठाया मामला

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहित सूद और अन्य सदस्य भी मौजूद थे। बार एसोसिएशन की ओर से मामले को अदालत के संज्ञान में लाया गया।

कानूनी समुदाय की मौजूदगी ने इस मामले को अतिरिक्त महत्व दिया, क्योंकि एक अधिवक्ता द्वारा भ्रष्टाचार के कथित मामलों को लेकर दायर PIL के बाद उसके निजी परिसर पर कार्रवाई का मुद्दा सीधे हाईकोर्ट के सामने आया।

सराफ ने अपने बयान में कहा कि फार्महाउस पर demolition notice चस्पा किया गया था, लेकिन उनके अनुसार उन्हें कोई speaking order उपलब्ध नहीं कराया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब पर्यटन विभाग की ओर से जारी नोटिस कथित तौर पर mining mafia के साथ मिलीभगत का परिणाम है। इन आरोपों पर भी संबंधित पक्षों का अंतिम जवाब और न्यायिक निर्णय प्रतीक्षित है।

11 सितंबर तक नहीं होगी कार्रवाई

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पंजाब सरकार ने अदालत के सामने 11 सितंबर तक demolition नहीं करने का undertaking दिया है। इसका मतलब यह है कि इस अवधि के दौरान फार्महाउस के खिलाफ प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसके बाद मामले की स्थिति अदालत में आगे की सुनवाई और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया से तय होगी।

मामले ने पंजाब में प्रशासनिक कार्रवाई, भ्रष्टाचार के आरोपों और न्यायिक निगरानी को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। एक तरफ राज्य सरकार का कहना है कि फार्महाउस से संबंधित प्रक्रिया पुराने नोटिस और बाद में पारित speaking order के आधार पर चल रही है, वहीं सराफ इसे अपनी PIL के बाद शुरू हुई कार्रवाई से जोड़ रहे हैं।

अब सभी की निगाहें 11 सितंबर की अगली कानूनी कार्रवाई पर रहेंगी। उस समय अदालत के सामने यह स्पष्ट हो सकता है कि फार्महाउस को लेकर प्रशासन आगे क्या कदम उठाना चाहता है और निखिल सराफ की ओर से लगाए गए आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

फिलहाल हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार का undertaking फार्महाउस पर तत्काल demolition की आशंका को टालता है, लेकिन पूरे विवाद का अंतिम समाधान अभी न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *