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10 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी गुरप्रीत कौर से जुड़े कथित रिश्वत आरोपों पर चंडीगढ़ की एक अदालत ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रणजीत सिंह, शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को गुरप्रीत कौर के खिलाफ कथित रिश्वत मांगने से संबंधित अपुष्ट और मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या सोशल मीडिया पर साझा करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।

यह आदेश गुरप्रीत कौर की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे और अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग पर आया। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रक्षित ने मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। अदालत ने फिलहाल मौजूदा पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को हटाने का निर्देश नहीं दिया है।

क्या हैं रिश्वत के आरोप?

मामला एक रेप केस में आरोपी को कथित तौर पर मदद पहुंचाने के लिए 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगे जाने के आरोपों से जुड़ा है। आरोपों में दावा किया गया था कि गुरप्रीत कौर ने आरोपी की मदद के लिए कथित तौर पर इतनी बड़ी रकम की मांग की थी।

गुरप्रीत कौर ने इन आरोपों को गलत और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। उनकी ओर से अदालत में कहा गया कि सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए कथित आरोपों का उद्देश्य उनकी छवि को खराब करना था।

अदालत के सामने यह भी बताया गया कि पूर्व जज रणजीत सिंह ने 20 अगस्त 2026 को गुरप्रीत कौर के खिलाफ आरोप लगाए थे। इसके बाद एक समाचार मंच से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से भी इन आरोपों को प्रसारित किए जाने की बात अदालत के समक्ष रखी गई।

मजीठिया और खैरा पर भी आरोप

गुरप्रीत कौर की याचिका के अनुसार, बिक्रम मजीठिया ने 1 सितंबर को चंडीगढ़ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके खिलाफ अभियान शुरू किया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की सामग्री बाद में X, Facebook, Instagram और YouTube जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी अपलोड की गई।

इसी तरह कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा पर भी समान आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाने की बात कही गई। याचिका में दावा किया गया कि आरोपों से संबंधित सामग्री को पर्याप्त सत्यापन के बिना लगातार प्रसारित किया गया।

मामले में सिमरनजीत हुंदल का नाम भी महत्वपूर्ण है। उन्हें कथित तौर पर गुरप्रीत कौर और रेप केस के आरोपी के बीच मध्यस्थता करने वाला बताया गया था। हालांकि, हुंदल ने इन आरोपों को गलत बताते हुए सार्वजनिक रूप से उनका खंडन किया है।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि गुरप्रीत कौर ने अपने पक्ष में मामला बनाया है। अदालत के मुताबिक, उसके सामने पेश की गई सामग्री के आधार पर प्रतिवादियों की ओर से किए गए पोस्ट, वीडियो और तस्वीरें फिलहाल किसी ठोस प्रमाण से पुष्ट नहीं दिखाई देतीं।

अदालत ने यह भी कहा कि आरोपों से संबंधित सामग्री को उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित किए बिना पोस्ट किया गया प्रतीत होता है। जज ने प्रतिष्ठा को व्यक्ति की गरिमा का अभिन्न हिस्सा बताते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी व्यक्ति के प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसी आधार पर अदालत ने प्रतिवादियों को आगे ऐसे अपुष्ट मानहानिकारक आरोप प्रकाशित या प्रसारित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।

मौजूदा पोस्ट हटाने पर अभी फैसला नहीं

गुरप्रीत कौर ने अदालत से सोशल मीडिया पर पहले से उपलब्ध पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को हटाने या डिलीट कराने की भी मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इस चरण में ऐसा आदेश जारी नहीं किया।

अदालत ने कहा कि Facebook, Instagram और X के अधिकारियों को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए मौजूदा सामग्री को जबरन हटाने का कोई विशिष्ट निर्देश फिलहाल नहीं दिया जा सकता। इस मुद्दे पर प्रतिवादियों को नोटिस दिए जाने और उनकी बात सुनने के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।

रेप केस की जांच भी विवादों में

जिस मामले से रिश्वत के आरोप जुड़े हैं, उसमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर गुरविंदर सिंह उर्फ गुरी चहल आरोपी है। उसके खिलाफ मोहाली और अमृतसर में अलग-अलग मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों FIR में पुलिस ने कैंसलेशन रिपोर्ट दाखिल की है, जिसके बाद पीड़ितों ने जांच में पक्षपात के आरोप लगाए हैं। आरोपी के देश से बाहर चले जाने की भी जानकारी सामने आई है।

अगस्त में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी 5 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोपों का संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था। इस बीच मोहाली के एक निवासी ने जांच को CBI को सौंपने की मांग करते हुए जनहित याचिका भी दायर की है।

सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है और इन्हें सरकार की छवि खराब करने की कोशिश बताती रही है।

30 सितंबर को अगली सुनवाई

अदालत का मौजूदा आदेश अंतिम फैसला नहीं है। यह एक अंतरिम रोक है, जो अगली सुनवाई तक लागू रहेगी। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

इस मामले में आगे की सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि कथित आरोपों और सोशल मीडिया सामग्री को लेकर अदालत का रुख क्या रहता है। फिलहाल अदालत ने अपुष्ट आरोपों के प्रसार पर रोक लगाकर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि सार्वजनिक बहस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और गरिमा की भी कानूनी सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

Bharat Baani Bureau

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