15 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। काम का दबाव, देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, यात्रा और बदलती दिनचर्या के कारण कई लोगों की नींद पूरी नहीं हो पाती। सप्ताह के दौरान कम सोने के बाद अक्सर लोग सोचते हैं कि सप्ताहांत में ज्यादा देर तक सोकर खोई हुई नींद पूरी कर लेंगे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की कमी पूरी करना केवल कुछ घंटे अतिरिक्त सो लेने से नहीं होता।
बेहतर नींद के लिए नियमित शेड्यूल, पर्याप्त नींद और शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को बनाए रखना जरूरी है। अगर कई दिनों से नींद पूरी नहीं हुई है तो कुछ अतिरिक्त नींद मदद कर सकती है, लेकिन बहुत देर तक सोना रोजाना की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
सबसे पहले समझें ‘स्लीप डेट’ क्या है
जब व्यक्ति अपनी जरूरत से कम सोता है तो उसके शरीर में नींद की कमी जमा होती जाती है। इसे आम तौर पर Sleep Debt कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को हर रात लगभग आठ घंटे की नींद की जरूरत है लेकिन वह लगातार पांच या छह घंटे ही सो रहा है, तो कुछ दिनों में नींद की कमी काफी बढ़ सकती है।
इसका असर केवल थकान तक सीमित नहीं रहता। नींद की कमी से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, प्रतिक्रिया का समय, मूड और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
सप्ताहांत में ज्यादा सोना कितना सही?
सप्ताहांत में सामान्य से कुछ अधिक सोना शरीर को आराम देने में मदद कर सकता है। खासकर अगर पिछले कुछ दिनों में नींद कम रही हो तो एक-दो रात पर्याप्त नींद लेना फायदेमंद हो सकता है।
लेकिन सप्ताह के दिनों में लगातार नींद कम करके सप्ताहांत में बहुत ज्यादा सोना शरीर की आंतरिक घड़ी को बिगाड़ सकता है। सोमवार को फिर जल्दी उठने पर व्यक्ति को दोबारा थकान और नींद महसूस हो सकती है।
इसलिए बेहतर रणनीति यह है कि सप्ताहांत और कामकाजी दिनों के सोने-जागने के समय में बहुत बड़ा अंतर न हो।
खोई नींद पूरी करने का बेहतर तरीका
अगर हाल के दिनों में नींद कम हुई है तो शरीर को धीरे-धीरे सामान्य नींद की ओर वापस लाना बेहतर माना जाता है।
1. सोने का समय नियमित करें
हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। इससे शरीर की सर्केडियन रिदम को स्थिर रहने में मदद मिलती है।
2. पर्याप्त नींद लें
अधिकांश वयस्कों को नियमित रूप से कम से कम सात घंटे की नींद की जरूरत होती है। कुछ लोगों को इससे अधिक नींद भी आवश्यक हो सकती है।
नींद की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उसकी अवधि। बार-बार नींद टूटने से पर्याप्त घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद व्यक्ति तरोताजा महसूस नहीं कर सकता।
3. सुबह की रोशनी लें
सुबह प्राकृतिक रोशनी में समय बिताना शरीर की आंतरिक घड़ी को नियमित करने में मदद कर सकता है। सुबह उठने के बाद बाहर कुछ समय बिताना नींद-जागने के चक्र के लिए उपयोगी हो सकता है।
4. दिन में लंबी झपकी से बचें
बहुत ज्यादा थकान होने पर छोटी झपकी मदद कर सकती है, लेकिन दिन में लंबी या देर शाम की नींद रात में सोने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
अगर झपकी लेनी हो तो उसे छोटा रखना बेहतर है।
सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें
मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप का देर रात तक इस्तेमाल नींद की तैयारी को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा सोशल मीडिया, वीडियो और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन दिमाग को सक्रिय बनाए रखते हैं।
सोने से पहले शांत वातावरण बनाना, रोशनी कम करना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाना बेहतर नींद में मदद कर सकता है।
कैफीन और शराब पर ध्यान दें
दोपहर बाद या शाम को ज्यादा कैफीन लेने से कुछ लोगों में रात की नींद प्रभावित हो सकती है। कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक और कुछ अन्य पेय में कैफीन मौजूद होता है।
इसी तरह शराब से नींद आने में आसानी महसूस हो सकती है, लेकिन इससे नींद की गुणवत्ता और रात के दूसरे हिस्से में नींद की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
सिर्फ ज्यादा सोना हमेशा समाधान नहीं
अगर कोई व्यक्ति लगातार पर्याप्त समय सोने के बावजूद दिनभर थका हुआ रहता है, तो समस्या केवल नींद की अवधि की नहीं हो सकती। खर्राटे, रात में बार-बार जागना, सांस रुकने जैसी समस्या या लंबे समय से बनी दिन की अत्यधिक नींद किसी नींद संबंधी विकार का संकेत हो सकती है।
ऐसी स्थिति में केवल सप्ताहांत में ज्यादा सोने के बजाय डॉक्टर या नींद विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
नींद को प्राथमिकता बनाना जरूरी
नींद को अक्सर काम, मनोरंजन या दूसरे दैनिक कार्यों के मुकाबले कम महत्व दिया जाता है। लेकिन पर्याप्त नींद शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
खोई हुई नींद को पूरी करने का सबसे अच्छा तरीका यह नहीं है कि एक दिन 10–12 घंटे सो लिया जाए और बाकी दिनों में नींद कम कर दी जाए। बेहतर तरीका है कि कुछ अतिरिक्त आराम के साथ नियमित नींद की आदत दोबारा स्थापित की जाए।
अगर नींद की कमी कई सप्ताह या महीनों से चली आ रही है, तो रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लेने की दिशा में बदलाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
अंततः अच्छी नींद का कोई शॉर्टकट नहीं है। नियमित समय पर सोना, पर्याप्त अवधि तक सोना और शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की घड़ी का सम्मान करना ही लंबे समय में नींद की कमी से उबरने का सबसे प्रभावी तरीका है।
