31 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : लंबी दूरी की हवाई यात्रा (Long-haul Travel) के बाद होने वाला जेट लैग केवल थकान और नींद को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह ब्लड शुगर (ग्लूकोज) के स्तर पर भी असर डाल सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय क्षेत्र (Time Zone) बदलने से शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) असंतुलित हो जाती है, जिससे ग्लूकोज नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
जेट लैग के कारण नींद पूरी न होना, भोजन के समय में बदलाव, तनाव और शारीरिक गतिविधि में कमी जैसे कारक इंसुलिन की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इससे कुछ लोगों, विशेषकर मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में ब्लड शुगर बढ़ने या घटने की संभावना रहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यात्रा के दौरान अनियमित खानपान, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन और पानी कम पीना भी ग्लूकोज स्तर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए लंबी उड़ानों में पर्याप्त पानी पीना, समय पर हल्का और संतुलित भोजन करना तथा यथासंभव हल्की शारीरिक गतिविधि बनाए रखना जरूरी है।
डायबिटीज से पीड़ित लोगों को यात्रा से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेने, दवाओं और इंसुलिन की सही योजना बनाने तथा नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करने की सलाह दी जाती है। नई टाइम ज़ोन के अनुसार दवा लेने का समय भी डॉक्टर की सलाह से तय करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त आराम, अच्छी नींद और यात्रा के बाद धीरे-धीरे स्थानीय समय के अनुसार दिनचर्या अपनाने से जेट लैग के प्रभाव को कम किया जा सकता है और ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है।
